
*गरियाबंद*:- जिले में इन दिनों कुछ सरकारी कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पंचायत सचिव, डॉक्टर, शिक्षक सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी कार्यालयीन समय में जनप्रतिनिधियों के साथ कार्यक्रमों, बैठकों और दौरों में लगातार नजर आ रहे हैं। इससे सरकारी दफ्तरों के नियमित कामकाज पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
दफ्तरों में ताले, जनता परेशान
ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार कई बार लोग प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, जन्म-मृत्यु पंजीयन, मनरेगा भुगतान या अन्य योजनाओं से संबंधित कार्यों के लिए पंचायत और ब्लॉक कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन संबंधित कर्मचारी उपलब्ध नहीं मिलते। स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और स्कूलों में शिक्षकों के समय पर न पहुंचने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब कर्मचारी अपने मूल दायित्वों को छोड़कर नेताओं के कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं, तो आम जनता को अनावश्यक चक्कर लगाने पड़ते हैं। इससे शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठने लगे हैं
आचरण नियमावली का क्या?
सरकारी कर्मचारियों पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम लागू होते हैं, जिनमें राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखने और प्रशासनिक निष्पक्षता बनाए रखने का स्पष्ट प्रावधान है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या कार्यालयीन समय में नेताओं के साथ कार्यक्रमों में भागीदारी नियमों के अनुरूप है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कर्मचारी विभागीय समन्वय या शासकीय कार्यक्रमों के तहत शामिल होते हैं, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन यदि सहभागिता नियमित रूप से गैर-आवश्यक कार्यक्रमों में हो रही है, तो यह सेवा नियमों की भावना के विपरीत माना जा सकता है।
प्रशासन की भूमिका पर निगाह
जिले में इन चर्चाओं के बीच अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिक गई हैं। क्या प्रशासन इस विषय में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करेगा? क्या कार्यालयीन समय में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बरती जाएगी?
निष्पक्षता और जवाबदेही जरूरी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि कर्मचारी राजनीतिक छवि के साथ जुड़े दिखते हैं, तो इससे सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है।
अब यह देखना होगा कि गरियाबंद में उठ रहे इन सवालों पर जिला प्रशासन किस तरह की स्पष्ट नीति और निगरानी तंत्र लागू करता है, ताकि सरकारी सेवा और राजनीतिक गतिविधियों के बीच संतुलन कायम रह सके और आम जनता को समय पर सेवाएं मिलती रहें।









