रवि राज रजक की विशेष रिपोर्ट
बिलासपुर:—कोटा विकासखंड के ग्राम उपका स्थित नर्मदा कुंड परिसर में इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और पारंपरिक गरिमा के साथ मनाया गया। पार्थिव शिवलिंग निर्माण, नर्मदा जल से जलाभिषेक, रामचरितमानस पाठ और मानस प्रवचन जैसे धार्मिक आयोजनों ने समस्त ग्रामवासी और आगंतुक श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
पार्थिव शिवलिंग और शिवभक्ति का पवित्र दृश्य
सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन नर्मदा कुंड क्षेत्र में प्रारंभ हो गया। शुद्ध मिट्टी से बने पार्थिव शिवलिंगों की रचना कर, श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का नर्मदा जल से अभिषेक किया। चारों ओर “ॐ नमः शिवाय” के उच्चारण से वातावरण गूंज उठा।
नर्मदा जल के पवित्र स्पर्श और शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हुए श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाएं शिवचरणों में समर्पित कीं।
रामचरितमानस पाठ: भक्ति का संगम
महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में अखंड रामचरितमानस पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें ग्राम की रामजी मंडली, सहदेव जी, ईश्वर सिंह उइके सहित अनेक श्रद्धालुजन शामिल रहे। पाठ की प्रत्येक चौपाई के साथ भावों की गंगा बहती रही, जिससे श्रद्धालु गद्गद हो उठे।
प्रवचन से भावविभोर हुए श्रद्धालु
रामचरितमानस पाठ के मध्य मानस प्रवचन का आयोजन हुआ, जिसमें ग्राम के ही विद्वान वक्ता सूर्यकांत वाजपेई ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा:
> “रामचरितमानस केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन करने वाला एक प्रकाशपुंज है। यह हमें संयम, सेवा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।”
उनके प्रवचन ने न केवल श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि उन्हें जीवन के आध्यात्मिक और व्यावहारिक पहलुओं पर भी विचार करने के लिए प्रेरित किया
भोज और सामूहिकता का भाव
पूजन और पाठ के पश्चात सामूहिक प्रसादी (भंडारा) का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण किया। ग्रामवासियों द्वारा पूरी व्यवस्था सामूहिक सहयोग और सेवा-भाव से की गई थी।
प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम
नर्मदा कुंड, अपने प्राचीन मंदिरों और चारों ओर फैले पर्वतीय क्षेत्र के कारण एक आध्यात्मिक और नैसर्गिक तीर्थ बन चुका है। यहां की पवित्रता और शांति श्रद्धालुओं को एक विशेष ऊर्जा प्रदान करती है।
समापन और आभार
कार्यक्रम के अंत में समस्त ग्रामवासियों, अतिथियों, पुजारियों और सहयोगी मंडलियों का आभार व्यक्त करते हुए आयोजन का समापन किया गया।
इस महाशिवरात्रि उत्सव ने न केवल भक्ति की भावना को जागृत किया, बल्कि ग्राम उपका की एकता, परंपरा और संस्कृति को और मजबूत किया।








