
जल संसाधन विभाग के इंजीनियर रहते नदारत नहर निर्माण भगवान भरोसे
किसानो की सुविधा के लिए नहर निर्माण कार्य किया जाता है लेकिन कुछ सालों में ही नहर जर्जर हो जाता है फिर होता है रिटेंडर का खेल
शासन द्वारा करोड़ों की लागत से विकास कार्य किया जाता है लेकिन विभाग व ठेकेदार द्वारा शासन के महात्वाकांक्षी योजनाओं पर पानी फेर दिया जाता है
कोटा ब्लॉक के अंतर्गत किसानो की सुविधा के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से नहर निर्माण व एनीकट का निर्माण कार्य विभिन्न जगहों में कराए जा रहे हैं यह कार्य जल संसाधन विभाग द्वारा कराया जा रहा है आपको बता दे की निर्माण कार्यों में विभाग के ना ही कोई अधिकारी मौजूद होता है और ना ही ठेकेदार मौके पर अकुशल मजदूरों के द्वारा निर्माण कार्य किया जाता है जिसका मुख्य कारण है कि कुछ ही सालों में नवनिर्मित निर्माण कार्य जर्जर स्थिति पर पहुंच जाता है फिर होता है रिटेंडर का खेल खेला जाता है जिसमें वर्तमान में आमामुडा से मझवानी तक तकरीबन 12 किलोमीटर का नहर निर्माण कार्य कराया जा रहा है
जिसमें घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है जिससे निर्माण कार्य में किसानों द्वारा वजन प्रतिनिधियों द्वारा शिकायत की जाती है लेकिन अधिकारी ना ही इसकी जांच करते हैं और ना है ठेकेदार पर कोई कार्यवाही की जाती है इसका मुख्य कारण है कमिशन का खेल जिससे अधिकारी किसी प्रकार की जांच नहीं की जाती जबकि समय-समय पर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच लेब में ले जाकर की जानी चाहिए लेकिन कागजों पर जांच की जाती है और गुणवत्ता प्रमाण पत्र दे दिया जाता है अब इस तरह के घटिया निर्माण कार्यों के लिए शासन द्वारा कैसे रोका जा सकता है यह देखने वाली बात है
श्रमिकों के अधिकारों का हनन ठेकेदार द्वारा किया जाता है शिकायत के बाद श्रम विभाग की तरफ से ठेकेदार को दिया गया नोटिस
नहर निर्माण में मजदूरों से निर्माण कार्य को कराया जाता है जिसमें मजदूरों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती ना ही उनकी सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखा जाता है मजदूरी भी कम दी जाती है आपको बता दें कि नहर निर्माण के बगल में ही तंबू लगाकर मजदूर रातों का गुजारा करते हैं ना हीं उनके पास पर्याप्त मात्रा में ठंड से बचने की सामग्री दी जाती है बाहर से आए हुए मजदूर मजबूर होकर ठेकेदार के अधीनस्थ काम करते हैं श्रम विभाग के अधिकारी क्या श्रमिकों को न्याय दिला पाएंगे









