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अनियमित, संविदा कर्मी फिर ठगे गए, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, रोजगार सरकार की प्राथमिकता में नहीं- रामकृष्ण तिवारी

गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट
गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट

*गरियाबंद*:- साय सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व जनता सभापति रामकृष्ण तिवारी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में आयरन स्टील, रोलिंग मिल, कृषि और वनोपज प्रसंस्करण आधारित इकाइयां ही औद्योगित अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, लेकिन इस बजट में उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए कुछ भी नहीं है। बस्तर की इमली के मांग दुनियां भर में थी, जगदलपुर का मंडी एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी हुआ करती थी, इस सरकार ने उसे पूरा खत्म कर दिया। उद्योग के नाम पर केवल वनों की कटाई और खनिज संसाधनों के असंतुलित दोहन को ही प्रोत्साहन मिल रहा है, अनियमित और संविदा कर्मचारियों से 100 दिन में नियमितीकरण वादा था, लेकिन साय सरकार के तीसरे बजट में भी उनके साथ धोखा ही हुआ। रसोईया संघ पिछले दो महीना से हड़ताल पर है, दो-दो बहनों की अनशन के दौरान मौत हो गई, लेकिन इस बजट में वे भी ठगी गई।

पूर्व जनता सभापति रामकृष्ण तिवारी ने कहा है कि भाजपा की सरकार में किसानों के साथ फिर से धोखा किया है। पिछले 2 साल की तरह इस साल भी एमएसपी वृद्धि का लाभ किसानों को नहीं दिया जाएगा। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने 2500 रुपए प्रति क्विंटल का वादा किया था, लेकिन एमएसपी वृद्धि का लाभ देते हुए 2660 रुपए में खरीदी किया, इस बजट से साफ है कि भाजपा सरकार एमएसपी वृद्धि का लाभ किसानों को आने वाले साल में भी नहीं देगी। 500 रुपए में गैस सिलेंडर की सरकार की मंशा बजट में कही नहीं है, महतारी वंदन में बजट लगभग यथावत रखने का तात्पर्य है कि नए हितग्राहियों को शामिल करने की मंशा नहीं है। सड़कों के लिए केवल 9450 करोड़ ऊंट के मुंह में जीरा है। आयुष्मान योजना में 1700 करोड़ से अधिक का भुगतान लंबित है, 1 साल के लिए 3000 करोड़ से अधिक की राशि की आवश्यकता होगी, इस बार मात्र 1500 करोड़ का बजट प्रावधान सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है।

पूर्व जनपद सभापति रामकृष्ण तिवारी ने कहा है कि पर्यटन और संस्कृति के नाम पर यह सरकार केवल झूठे वादे करती है, इस बजट में राम वन गमन पथ के लिए फूटी कौड़ी उपलब्ध नहीं है। प्रति व्यक्ति आय राज्य बनने के समय मात्र 10125 था, जो 2023-24 तक बढ़कर 139000 हो गया लेकिन भाजपा की सरकार में वृद्धि उस अनुपात में नहीं हो रहा है, बल्कि आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ रही है। कुल मिलाकर साय सरकार के इस तीसरे बजट से प्रदेश के किसान, मजदूर, महिलाएं और प्रदेश के युवाओं को निराशा ही हाथ लगी है।

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