
*गरियाबंद :-* गरियाबंद जिले के पशु चिकित्सा विभाग में नियमों और प्रशासनिक आदेशों को ठेंगा दिखाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ डॉ. टामेश कंवर अपने तबादले के तीन साल बाद भी उसी स्थान पर जमे हुए हैं, पशु चिकित्सालय गरियाबंद से उनका तबादला सुकमा जिले के दोरनापाल में किया गया था।
हैरानी की बात यह है कि उनके स्थान पर एवजीदार के रूप में पदस्थ होने आए दूसरे डॉक्टर ने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया है, इसके बावजूद पूर्व डॉक्टर को विभाग के उपसंचालक द्वारा कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है।
कांग्रेस सरकार में हुआ था तबादला, अब तक अटके
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह मामला तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का है जब बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादले किए गए थे। इस डॉक्टर का स्थानांतरण भी दोरनापाल जिला सुकमा में कर दिया गया था। नियमतः, स्थानांतरण आदेश जारी होने के कुछ दिनों के भीतर ही कर्मचारी को कार्यमुक्त होना होता है। लेकिन पशुपालन विभाग के उपसंचालक के संरक्षण के चलते डॉक्टर ने अन्य हथकंडे अपनाकर उसी स्थान पर बने रहना उचित समझा।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा की सरकार बनी और प्रशासनिक फेरबदल की उम्मीदें जगीं। लेकिन गरियाबंद के इस मामले में सरकार बदलने का कोई असर नहीं दिखा है। संबंधित डॉक्टर का तबादला हुए तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन वे अभी भी अपनी पुरानी सीट पर जमे हुए हैं।
उपसंचालक की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा सवाल उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं की भूमिका पर उठ रहे हैं। जब एवजीदार डॉक्टर ने आकर जॉइनिंग ले ली है, तो पुराने डॉक्टर को कार्यमुक्त न करना प्रशासनिक शिथिलता की ओर इशारा करता है। जानकारों का कहना है कि बिना उच्चाधिकारियों के संरक्षण के तीन साल तक तबादला आदेश को ठंडे बस्ते में डालना असंभव है। उक्त स्थान पर एवजीदार डॉक्टर पदस्थ हैं लेकिन तबादला पाए डॉक्टर भी वहां काम कर रहे हैं।
यह स्थिति विभागीय अनुशासन के लिए घातक साबित हो रही है। अब देखना यह है कि क्या शासन-प्रशासन इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है और नियम विरुद्ध जमे डॉक्टर को रिलीव करता है या नहीं।
डॉ ओंमकार प्रसाद तिवारी उपसंचालक पशु चिकित्सा अधिकारी से पिछले कई दिनों से सम्पर्क करने की कोशिश की मगर उनके द्वारा अब तक फोन रिसीव नहीं किया गया और ना ही किसी प्रकार का कॉल बैक किया गया जिसके बाद उनकी ऑफिस जाकर भी संपर्क करने का प्रयास लगातार किया गया मगर ऑफिस में भी संपर्क नहीं हुआ। ऐसे में अब क्या समझे क्या जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले को लेकर कुछ कहना नहीं चाहते या कोई और बात है।








