पता बताने पर सरपंच प्रतिनिधि विनय शुक्ला व माता पिता द्वारा एक -एक लाख रुपये का इनाम की घोषणा
भरारी, रतनपुर:—-
31 जुलाई की शाम थी। भरारी गांव की गलियों में बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं।
माँ लीलावती रसोई में रोटियाँ बेल रही थीं, तभी उनका 13 साल का बेटा चिन्मय दरवाज़े पर आ खड़ा हुआ —
“माँ, मैं दोस्तों के साथ खेलने जा रहा हूँ… थोड़ी देर में आ जाऊँगा।” माँ ने मुस्कुराकर हामी भरी, लेकिन उस समय उन्होंने नहीं सोचा था कि यह ‘थोड़ी देर’ ज़िंदगी की सबसे लंबी इंतज़ार बन जाएगी।शाम ढली, अंधेरा गहराने लगा… लेकिन चिन्मय घर नहीं लौटा।माँ का दिल घबराने लगा, पिता संजय सूर्यवंशी ने इधर-उधर फोन करना शुरू किया। दोस्तों से, पड़ोसियों से, रिश्तेदारों से पूछा — पर किसी ने चिन्मय को नहीं देखा।
रात की खामोशी में एक-एक मिनट भारी हो गया।
चिन्मय के पास पिता का मोबाइल था। शुरुआत में कॉल लगती रही, लेकिन देर रात वह भी बंद हो गया। इस खामोशी ने डर को और गहरा कर दिया।
12 दिन का इंतज़ार
गांव की गलियों, खेतों, जंगलों, नालों, तालाबों तक हर जगह खोजबीन की गई। यहां तक कि दूर-दराज़ के रिश्तेदारों के घर भी देख लिए गए।
पर हर जगह बस खालीपन मिला।
अब 12 दिन हो गए हैं, लेकिन चिन्मय का कोई सुराग नहीं।
माँ-बाप की गुहार
थके हुए, रो-रोकर सूखी आंखों वाले माता-पिता ने अब 1 लाख रुपये इनाम की घोषणा की है —
“जो भी मेरे बेटे का पता बताएगा, मैं अपनी आखिरी सांस तक उसका आभारी रहूँगा।”
पुलिस की कोशिशें
1 अगस्त को रतनपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई। थाना प्रभारी नरेश चौहान खुद गांव-गांव जाकर तलाश कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
गांव की दुआएं-
भरारी में अब हर शाम मंदिर में दिया जलाकर लोग एक ही प्रार्थना करते हैं —
“हे माँ महामाया, हमारे चिन्मय को सही सलामत घर लौटा दो।”
गांव के दरवाजों पर अब भी वही उम्मीद टंगी है…
कहीं से अचानक दस्तक हो… और आंगन में फिर से वही मासूम मुस्कान गूंज उठे।









