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गणेशपुरी (कारीआम) – मैकल आंचल की पावन भूमि और गणेश जी की दिव्य कथा

रवि राज रजक की रिपोर्ट

गणेश जी की स्वयंभू प्रतिमा – उत्पत्ति और विशेषता

कारीआम में विराजित गणेश जी की प्रतिमा अत्यंत प्राचीन मानी जाती है। यह प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है, अर्थात इसे मनुष्य ने नहीं बनाया।
स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, सतयुग में ऋषि-मुनियों के तप और साधना के प्रभाव से यह विग्रह शिला पर स्वयं प्रकट हुआ।
विशेष बात यह है कि यह प्रतिमा बिना छैनी और हथौड़ी के प्रयोग के शिला पर बनी हुई है, मानो प्रकृति ने स्वयं इसे आकार दिया हो।

इच्छापूर्ति गणपति की मान्यता

कारीआम के गणेश जी को इच्छापूर्ति गणपति बप्पा कहा जाता है।
मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु मन से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।
प्रथम दर्शन के समय जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह विशेष रूप से सफल होती है।
कई श्रद्धालुओं के अनुभव और जनश्रुतियाँ हैं कि गणेश जी की कृपा से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
यही कारण है कि आसपास के क्षेत्र ही नहीं, दूर-दराज से भी भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।

मंदिर और पर्व उत्सव का महत्व

प्राचीन काल से ही यहां ऋषि-मुनियों और साधकों का आगमन होता रहा है।
भाद्रपद मास के गणेश चतुर्थी और चतुर्दशी के समय यहां का बड़ी संख्या में दर्शनार्थ आते हैं । नवरात्रि के समय नवधा रामायण पूरी रात्रि होती है जिसमें ग्रामीण जन मिलकर के भगवान राम की कथा का रसपान करते हैं और संगीत में निशा होती है जिसमें क्षेत्र के अनेक कलाकार आकर अपनी कला का प्रदर्शन करके उसका संवर्धन करते हैं स्वामी सहज प्रकाशानंद जी उसके पश्चात स्वामी सदानंद जी महाराज उसके पश्चात इस अलग को स्वामी शिवानंद जी महाराज अब जाग रहे हैं बड़े लंबे समय से ऋषि मुनि और संतों की यह भूमि अपने आप में अत्यंत पावन है
इस अवसर पर गणेश भगवान की भव्य आरती, भजन-कीर्तन, और विशेष पूजा-पाठ होता है।
ग्रामवासी और श्रद्धालु गणपति बप्पा को मोदक, दूर्वा, लड्डू और नारियल अर्पित करते हैं।
माना जाता है कि गणेश जी को अर्पित किया गया मोदक संतान, धन और सुख-समृद्धि प्रदान करता है।

गणेश जी और मछली की अद्भुत कथा

गणेश मंदिर के पास स्थित तालाब की कथा भी गणेश जी से जुड़ी है।
लोककथाओं के अनुसार, एक समय इस तालाब में एक अद्भुत और विशाल मछली रहती थी।
कहा जाता है कि यह मछली एक दिन तालाब का जल लेकर मैकल पर्वत की गहराइयों की ओर जाने लगी।
तब भगवान लक्ष्मण जी ने अपने बाण से उसका सिर काट दिया।
उस मछली का शरीर आज भी पत्थर के रूप में तालाब के पास विद्यमान है।
लोग इसे दैवी चमत्कार मानकर श्रद्धा से देखते हैं।

कारीआम का आध्यात्मिक प्रभाव

कारीआम का पूरा क्षेत्र प्राकृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिपीठ जैसा माना जाता है।
नर्मदा का पावन आंचल, अरपा की कल-कल करती धारा, मैकल की पहाड़ियों का रमणीय वातावरण और गणेश जी की दिव्य प्रतिमा –
ये सब मिलकर इस स्थान को एक अद्वितीय तीर्थस्थल बनाते हैं।

यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति शांति, श्रद्धा और ऊर्जा का अद्भुत अनुभव करता है।
गणेश जी की कृपा से अनेक श्रद्धालुओं ने अपने जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन महसूस किए है

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📝 संपादक की जानकारी

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