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रायपुर :—छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में रायगढ़ जिला प्रशासन की पहल किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। भू-अर्जन मुआवजा भुगतान की पारंपरिक चेक प्रणाली को समाप्त कर ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था लागू किए जाने से अब किसानों को उनकी राशि सीधे बैंक खातों में मिल रही है। इससे प्रक्रिया न केवल तेज और पारदर्शी हुई है, बल्कि किसानों का भरोसा भी मजबूत हुआ है।
यह व्यवस्था 26 सितंबर 2025 से रायगढ़ अनुविभाग में शुरू की गई थी। 30 मार्च 2026 तक 463 किसानों को कुल 15 करोड़ 49 लाख 71 हजार 225 रुपये की राशि उनके बैंक खातों में ऑनलाइन अंतरित की जा चुकी है। इनमें 156 किसानों को 9 करोड़ 82 लाख 45 हजार 952 रुपये मुआवजा राशि और 307 किसानों को 5 करोड़ 67 लाख 25 हजार 273 रुपये पुनर्वास एवं बोनस के रूप में दिए गए हैं।
गौरतलब है कि पहले चेक के माध्यम से भुगतान होने पर किसानों को बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे और प्रक्रिया में देरी होती थी। अब डिजिटल व्यवस्था से यह समस्या पूरी तरह खत्म हो गई है। ग्राम जामपाली के उपेंद्र पटेल बताते हैं कि अब राशि समय पर और आसानी से मिल रही है। वहीं गेजामुड़ा के बोधीराम पटेल के अनुसार बिना किसी परेशानी के सीधे खाते में भुगतान मिलना बड़ी राहत है। उच्चभिट्टी के राजकुमार चौधरी भी मानते हैं कि नई प्रणाली से प्रक्रिया बेहद सरल और तेज हो गई है।
ऑनलाइन भुगतान प्रणाली से हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हो रहा है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है। प्रशासनिक कार्यों में भी तेजी आई है और त्रुटियों की संभावना कम हुई है। रायगढ़ जिले की यह पहल राज्य में डिजिटल गवर्नेंस के एक सफल मॉडल के रूप में सामने आई है।





