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मगरमच्छों की शरणस्थली में इंसानी रोमांच का अतिक्रमण — खूंटाघाट जलाशय में बिना अनुमति चल रही एडवेंचर गतिविधियाँ वन्यजीवों के अस्तित्व पर संकट का संकेत

रतनपुर से रवि ठाकुर की रिपोर्ट
रतनपुर से रवि ठाकुर की रिपोर्ट

रतनपुर, जिला बिलासपुर:—-
प्रकृति की गोद में बसा खूंटाघाट जलाशय (खारंग) जहां अब तक शांत जल, गूंजते पंछियों के स्वर और मगरमच्छों की तैराकी से जीवन की एक आदिम लय बहती थी — आज वहीं पर इंसानी लालच और लापरवाही से वन्यजीवों के जीवन में खलल पड़ता नजर आ रहा है।

खारंग सेवा समिति द्वारा हाल ही में यहां वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर गतिविधियाँ प्रारंभ की गई हैं — लेकिन बिना वन विभाग की अनुमति और सुरक्षा मानकों के। इन साहसिक कहे जाने वाले खेलों के पीछे साहस कम, व्यावसायिक लोलुपता अधिक झलक रही है, जो न केवल जंगल की शांति को भंग कर रही है, बल्कि मगरमच्छों जैसे संरक्षित जल-जीवों की प्राकृतिक जीवनचर्या को भी खतरे में डाल रही है।

प्राकृतिक निवास में अतिक्रमण का भयावह रूप

खूंटाघाट क्षेत्र रतनपुर वनपरिक्षेत्र के अधीन है और यह संवेदनशील जल-जीव क्षेत्र के रूप में चिह्नित है। इस जलाशय में वर्षों से मगरमच्छों की उपस्थिति दर्ज है — जिनकी सुरक्षा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत सुनिश्चित की गई है। लेकिन, तेज मोटरबोट, कश्तियों की हलचल, और इंसानी रोमांच की उथल-पुथल ने इस शांत वास को एक संघर्ष क्षेत्र में तब्दील कर दिया है।

❝कौन सुनेगा खामोश मगरमच्छ की पुकार?❞

प्रशासनिक और पर्यावरणीय विशेषज्ञों का कहना है कि वन्यजीवों को भयभीत कर उनके निवास क्षेत्र में छेड़छाड़, न केवल अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि यह मानवीय नैतिकता के भी खिलाफ है। कोई यह क्यों नहीं सोचता कि जो मगरमच्छ वर्षों से यहां रहते आए हैं, उनके हिस्से का पानी हम इंसानों ने अपनी मौज के लिए क्यों हथिया लिया?

विभागीय चुप्पी, संवेदनशीलता पर सवाल

वन विभाग को इस अवैध गतिविधि की लिखित शिकायत प्राप्त हो चुकी है। स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह केवल एक प्राकृतिक संकट नहीं होगा, बल्कि एक दिन यह मानवीय त्रासदी का कारण भी बन सकता है।

जल की सतह पर चलने वाला रोमांच, जल के भीतर छुपे जीवन को कुचल रहा है…”

एक स्थानीय शिक्षक की भावुक टिप्पणी

अब सवाल यह है कि क्या विभाग जागेगा? क्या मगरमच्छों की शांति लौटेगी? या फिर प्रकृति की यह कराह एक और विकास के नाम पर कुचली जाएगी?

 

संवेदनशील मुद्दों पर सिर्फ बयान नहीं, कार्रवाई ज़रूरी है।

खूंटाघाट को बचाइए, प्रकृति को सांस लेने दीजिए

 

शिकायत होगी आज

शिकायत कर्ता ने बताया की आज मुख्य वन सरक्षक बिलासपुर से इस अवैध वाटर स्पोर्ट्स एडवेंचरस की शिकायत की जाएगी जिससे तत्काल इस पर रोक लगाया जा सके।

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