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भरारी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस बना सीख और संस्कार का पर्व

रतनपुर से रवि ठाकुर की रिपोर्ट
रतनपुर से रवि ठाकुर की रिपोर्ट

सरपंच प्रतिनिधि विनय शुक्ला ने बच्चों को दिल से दी समझाइश — “मोबाइल से नहीं, मां-बाप के संस्कारों से बनती है ज़िंदगी

भरारी, रतनपुर:—
15 अगस्त सिर्फ तिरंगा लहराने का दिन नहीं था, बल्कि भरारी गांव में यह दिन बच्चों के जीवन को सही दिशा दिखाने वाला एक अनमोल संदेश बनकर आया।ग्राम के शासकीय हायर सेकेंड्री स्कूल में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सरपंच प्रतिनिधि विनय शुक्ला ने ध्वजारोहण कर देश के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। लेकिन इस बार उनका संदेश सिर्फ राष्ट्रभक्ति तक सीमित नहीं रहा — उन्होंने बच्चों के भविष्य को लेकर एक गहरी बात कही, जो हर दिल को छू गई।

मोबाइल से नहीं, मां-बाप के संस्कारों से बनती है ज़िंदगी”

झंडा फहराने के बाद जब विनय शुक्ला मंच पर बोलने खड़े हुए, तो उनके शब्दों में अनुभव और अपनापन झलक रहा था। उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा —

> “बेटा, मोबाइल आज की ज़रूरत है लेकिन जब यह ज़रूरत लत बन जाए तो भविष्य बर्बाद हो जाता है। आप सब देश का भविष्य हो। पढ़ाई करो, खेलो, मस्ती करो लेकिन माँ-बाप की बात मानना सबसे ज़रूरी है। जब तक उनके आशीर्वाद और संस्कार साथ हैं, कोई भी मुश्किल तुम्हें तोड़ नहीं सकती।”

स्कूल बना सीख का मंदिर

शुक्ला ने न सिर्फ बच्चों से बात की, बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों से भी संवाद किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला उनका घर होता है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज जरूरत है कि हम तकनीक के साथ-साथ रिश्तों और मानवीय मूल्यों को भी सहेजें।

बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम से लूटा मन

इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने देशभक्ति गीत, भाषण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। कार्यक्रम में “वंदे मातरम्” और “ऐ वतन मेरे वतन” जैसे गीतों पर बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

गांववालों के चेहरों पर मुस्कान, बच्चों की आंखों में संकल्प

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अभिभावक, ग्रामीणजन और स्थानीय शिक्षक उपस्थित रहे। हर कोई शुक्ला के सहज और भावुक उद्बोधन से प्रभावित दिखा।
बच्चों ने भी प्रतिज्ञा ली कि वे मोबाइल का सीमित उपयोग करेंगे, अपने माता-पिता की बात मानेंगे और समाज व देश के लिए जिम्मेदार नागरिक बनेंगे।

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