रतनपुर से अजय गुप्ता की रिपोर्ट
रतनपुर :— इस बार शारदीय नवरात्र पर्व पर यदि आप माँ महामाया के दर्शन करने रतनपुर नही पहुँच पाएं हो तो हम आपको माता रानी के राजसी रूप का दर्शन करवा रहे है। महामाया का यह रूप वर्ष मे तीन बार अर्थात दोनों नवरात्रि के नवमी तिथि एवं दीपावली के दौरान देखने को मिलता है जब महामाया देवी का स्वर्णा भूषणों से अलौकिक एवं दिब्य श्रृंगार किया जाता है।
महामाया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आशीष सिंह ठाकुर ने बताया कि आज बुधवार 01 अक्टूबर को महानवमी तिथि के अवसर पर रतनपुर में महामाया देवी का स्वर्ण मुकुट (कंठाहार मुक्ताहार एवं रानीहार ) सहित कुंडल करधन एवं करीब सवा 2 किलो के छत्र को मिलाकर कुल सवा तीन किलो सोने के आभूषणों से महामाया देवी का अलौकिक दिब्य एवं राजसी श्रृंगार किया गया।
महामाया देवी के इस सिद्धि दात्री दिब्य स्वरूप को देखने श्रद्धालु पूरे दिन बड़ी तादात में रतनपुर स्थित महामाया मंदिर पहुँचते रहे। महा नवमीं के इस पावन अवसर पर महामाया देवी को 56 प्रकार के नैवैद्य भी अर्पित कर सामूहिक पुष्पांजलि अर्पित कर विश्व कल्याण की कामना की गई। इससे पहले 22 सितंबर 2025 से शुरू हुए शारदीय नवरात्रि के दौरान अष्टमी तिथि पर मंगलवार 30 सितंबर को देवी महामाया की विशेष पूजा के बाद हवन कर पूर्णा हुति दी गई।
10 लाख भक्तो ने किये माँ के दर्शन !
मंदिर प्रबंधन के अनुसार इस बार वासंती नवरात्रि के दौरान 9 दिनों में करीब 10 लाख भक्तो ने माँ महामाया के दर्शन कर अपने अभीष्ट की कामना की। इसी तरह नगर के अन्य प्रसिद्ध मंदिरो जैसे भैरव बाबा मंदिर लखनी देवी मंदिर गिरजावन हनुमान मंदिर सिद्धि विनायक मंदिर तुलजा भवानी मंदिर पुराना बस स्टैण्ड स्थित काली मंदिर कोटा रोड स्थित रानी सती मंदिर एवं रतनपुर बेलगहना मार्ग के ग्राम पोड़ी में जगत गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित प्रसिद्ध मंगला गौरी मंदिर में भी हवन पूजन एवं कन्या भोज के साथ शारदीय नवरात्र 2025 का समापन हुआ।









