
तखतपुर:—नशामुक्ति संकल्प चैपाल में 4 युवाओं ने सार्वजनिक रूप से नशा छोड़ने का संकल्प लिया
नशा है एक अभिशाप, इससे बचे रहें हम और आप और जीवन को करें सुरक्षित- डॉ. मनीष बंजारा
मुंगेली। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पदमपुर में ‘‘नशामुक्ति संकल्प चैपाल’’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष की ‘‘निकोटिन और तंबाकू की लत का पर्दाफाश थीम के तहत ग्रामीणों को तंबाकू एवं निकोटिन उत्पादों के दुष्प्रभाव की जानकारी देते हुए बताया गया कि तंबाकू में लगभग सात हजार से अधिक रासायनिक पदार्थ होते है जिनमें से 250 से अधिक हानिकारक और 70 से अधिक कैंसर पैदा करने वाला कार्सिनोजेनिक पदार्थ होते है। जिससे कैंसर होने की जानकारी देकर उससे बचाव के लिए जागरूक किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. मनीष बंजारा ने कहा, ‘‘नशा है एक अभिशाप, इससे बचे रहें हम और आप, जीवन को करें सुरक्षित। तंबाकू के सेवन से शरीर पर घातक प्रभाव पड़ते हैं। इसमें मौजूद निकोटीन और अन्य विषैले रसायन कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक, फेफड़ों की गंभीर बीमारियों (जैसे ब्रोंकाइटिस) और त्वचा संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बनते हैं। इसके अलावा, यह दांतों को खराब करता है और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करता है और तंबाकू धीरे-धीरे जीवन को खत्म करता है और परिवार की खुशियां छीन लेता है।’’ कार्यक्रम में उपस्थित ग्रामीणों, युवाओं को तंबाकू के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। सभी ने मिलकर तंबाकू मुक्त ग्राम निर्माण का संकल्प लिया तथा स्वयं तंबाकू से दूर रहने और समाज को जागरूक करने की शपथ ली।
बता दे कि आज नशा का स्वरूप इतना बढ़ गया है कि शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पहुंच युवाओं के माध्यम से हो गई है और गांव की पहचान नशेड़ी गांव के रूप मंे होने लगी है। जिसका दुष्परिणाम आम लोगो पर पड़ने लगी है और घरेलू हिंसा, झगड़े, अपराध और सड़क दुर्घटना से जनहानि होने लगी है। जिसे रोकने का एक मात्र उपाय नशा से लोगो को मुक्ति दिलाना है। नशा से मुक्त होने पर युवा वर्ग शिक्षा, खेल, रोजगार और सकारात्मक गतिविधियों की ओर अग्रसर होता है, जिससे गांव की नई पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित होता है। महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण प्राप्त होता है। गांव में सामाजिक एकता, आपसी भाईचारा और सामुदायिक सहभागिता बढ़ती है। श्रम उत्पादकता में वृद्धि होने से कृषि, व्यवसाय और अन्य आजीविकाओं में बेहतर परिणाम मिलते हैं। स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च कम होने से परिवारों की आर्थिक उन्नति होती है।
नशामुक्त ग्राम स्वच्छ, स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर ग्राम की पहचान बनता है। ऐसा गांव विकास योजनाओं का बेहतर लाभ प्राप्त कर आदर्श ग्राम के रूप में स्थापित हो सकता है। इसलिए नशामुक्ति केवल व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है और इस अवसर पर गांव के युवा नीलेश साहू, अजय खांडेकर, देवदास खांडे एवं अनिकेत ध्रुव ने सार्वजनिक रूप से नशा से मुक्ति का संकल्प लिया। उनका यह निर्णय उपस्थित युवाओं के लिए प्रेरणा और सकारात्मक संदेश बनकर उभरा। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम स्थल पर मुख जांच भी की गई, जिससे तंबाकू सेवन से होने वाले प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर समय पर परामर्श एवं उपचार उपलब्ध कराया जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की कि तंबाकू छोड़ना केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि परिवार और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य की जिम्मेदारी भी है। एक तंबाकू मुक्त व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रहता है तथा अपने परिवार को बीमारी, चिंता और आर्थिक बोझ से बचाता है।
इस अवसर पर ग्राम सरपंच अनिल जायसवाल की विशेष भूमिका रही। ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता ने तंबाकू मुक्त गांव के संकल्प को और अधिक मजबूत बनाया।
संदेश
‘‘तंबाकू की हर आदत जीवन को थोड़ा-थोड़ा कम करती है, जबकि इसे छोड़ने का हर प्रयास जीवन में नई उम्मीद, नई ऊर्जा और नई मुस्कान जोड़ता है। आइए, स्वस्थ समाज और तंबाकू मुक्त गांव के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।’’

विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर पदमपुर ने लिया तंबाकू मुक्त गांव का संकल्प">








