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मुफ्त राशन के चावल की खुली कालाबाजारी ! गरियाबंद में कोचियों और राइस मिलों का खेल, खाद्य विभाग बना मूकदर्शक

गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट
गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट

तीन माह का मुफ्त चावल बाजार में बिक रहा, गांव-गांव घूम रहे कोचिए, राइस मिलों तक पहुंच रहा सरकारी अनाज

*गरियाबंद* छत्तीसगढ़ प्रदेश सरकार द्वारा गरीब और जरूरतमंद राशन हितग्राहियों को राहत देने के उद्देश्य से तीन माह का मुफ्त राशन उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन गरियाबंद जिले में इस योजना का खुलेआम दुरुपयोग और कालाबाजारी सामने आ रही है। शासन की मंशा गरीब परिवारों तक मुफ्त अनाज पहुंचाने की है, मगर जिले में बड़ी मात्रा में यही सरकारी चावल बाजार और राइस मिलों तक पहुंच रहा है।
जानकारी के अनुसार कई राशन हितग्राही तीन माह का मुफ्त चावल लेने के बाद उसे गांवों में सक्रिय कोचियों और किराना दुकानदारों को बेच रहे हैं। इसके बाद कोचिए चारपहिया वाहनों में चावल भरकर राइस मिलों तक पहुंचा रहे हैं, जहां मोटे दामों में इसकी खरीदी-बिक्री की जा रही है। इस पूरे खेल में किराना दुकानदार, बिचौलिए और राइस मिल संचालकों की मिलीभगत की चर्चा क्षेत्र में जोरों पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिले के कई गांवों और मुख्य मार्गों पर खुलेआम सरकारी चावल की खरीदारी हो रही है। छुरा से राजिम रोड तक प्रतिदिन बड़ी मात्रा में चावल की सप्लाई देखी जा सकती है। वहीं देवरी, श्यामनगर से होते हुए राजिम से गरियाबंद रोड स्थित कई राइस मिलों में यह चावल पहुंचाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि कोचिए गांव-गांव घूमकर हितग्राहियों से कम कीमत में चावल खरीदते हैं और बाद में राइस मिलों में अधिक दाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि गरीबों के लिए मुफ्त में दिए जा रहे चावल को बेचकर कई हितग्राही महंगे और अच्छी क्वालिटी के चावल खरीदकर उपयोग कर रहे हैं। इससे सरकार की गरीब कल्याण योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, जरूरतमंद परिवारों के हिस्से का अनाज कालाबाजारी के जरिए व्यापार का जरिया बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि खाद्य विभाग को इस पूरे मामले की कई बार सूचना दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता के चलते कोचियों और कालाबाजारी करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। खुलेआम हो रही इस खरीद-फरोख्त से यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर सरकारी राशन की निगरानी व्यवस्था कितनी मजबूत है।

सवाल अब यह उठता है कि क्या खबर प्रशासन के बाद जिला प्रशासन समय रहते हुए राइस मिलों के सामने लगे सिटी कैमरा का जांच कर उचित कार्यवाही करेंगे या इस तरह का संरक्षण देने का काम करेंगे।

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