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विशेष लेख:- दूरस्थ अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की नई इबारत: नारायणपुर में समय पर उपचार, सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ बचपन की ओर सशक्त कदम

नारायणपुर से संतोष नाग की रिपोर्ट
नारायणपुर से संतोष नाग की रिपोर्ट

नारायणपुर :–घने जंगल, दुर्गम पहाड़ियां और सीमित संसाधनों के बीच बसे नारायणपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना लंबे समय तक एक चुनौती रहा है। लेकिन आज यही जिला जन-केंद्रित स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से एक नई पहचान बना रहा है। कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशन में जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं को केवल अस्पतालों तक सीमित न रखकर गांव-गांव तक पहुंचाने का प्रभावी प्रयास किया है।

इसका परिणाम यह है कि आज दूरस्थ आदिवासी अंचलों के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और ग्रामीण समय पर स्वास्थ्य जांच, विशेषज्ञ उपचार और सुरक्षित मातृत्व जैसी सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं

स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिले में संचालित प्रोजेक्ट धड़कन, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान तथा मायका सेंटर जैसी पहलें यह सिद्ध कर रही हैं कि मजबूत इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और प्रभावी कार्ययोजना के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

*प्रोजेक्ट धड़कन: नन्हीं धड़कनों को मिला नया जीवन*

जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 23 फरवरी 2026 से जिले में प्रोजेक्ट धड़कन प्रारंभ किया गया। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीमों ने आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण अभियान चलाते हुए अब तक 6,224 बच्चों की जांच की। जांच के दौरान हृदय संबंधी गंभीर समस्या से पीड़ित तीन बच्चों – पारुल दुग्गा (1.5 वर्ष), नायशा (3 वर्ष) एवं अनुष्का मंडावी (5 वर्ष) की पहचान की गई। आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण के बाद उन्हें सत्य साईं हॉस्पिटल, रायपुर रेफर किया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने तीनों बच्चों का निःशुल्क एवं सफल हृदय ऑपरेशन किया। आज तीनों बच्चे स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। यह उपलब्धि केवल सफल ऑपरेशन की कहानी नहीं, बल्कि समय पर स्क्रीनिंग, प्रभावी रेफरल व्यवस्था और संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणाली की सफलता का जीवंत उदाहरण है। यह पहल अनेक परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।

*मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान: स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं गांव-गांव*

दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से 14 अप्रैल से 31 मई 2026 तक जिले में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान संचालित किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को पार करते हुए गांव-गांव पहुंचकर 1,60,428 लोगों की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच की। अभियान में विशेषज्ञ चिकित्सक, मेडिकल अधिकारी, स्टाफ नर्स, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी (आरएचओ), मितानिन एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों ने सहभागिता निभाई। स्वास्थ्य परीक्षण के साथ आवश्यक दवाइयों का निःशुल्क वितरण किया गया तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को जिला अस्पताल एवं उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया गया। यह अभियान केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दूरस्थ ग्रामीणों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास स्थापित करने का माध्यम भी बना। जिन लोगों को पहले उपचार के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, उन्हें अब उनके गांव में ही समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हुईं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि जब स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के द्वार तक पहुंचती हैं, तब स्वास्थ्य सुरक्षा वास्तव में जन-जन तक पहुंचती है।

*मायका सेंटर: सुरक्षित मातृत्व की नई पहचान*

विकासखंड ओरछा (अबूझमाड़) के दुर्गम क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सदैव चुनौतीपूर्ण रहा है। इस चुनौती का समाधान बनकर सामने आए हैं जिले में संचालित 8 मायका सेंटर जो आदेर, कुड़मेल, ईरकभट्टी, बोरानिरपी, कोंगे, मसपुर, डूंगा एवं मोहंदी में संचालित हैं। ये सेंटर लगभग 110 गांवों की गर्भवती महिलाओं को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। प्रत्येक मायका सेंटर में प्रशिक्षित काउंसलर, स्टाफ नर्स तथा मोटर बाइक एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि दूरस्थ गांवों की गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित स्थान तक लाया जा सके। यहां नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पोषणयुक्त भोजन, आवश्यक परामर्श और सुरक्षित प्रसव की तैयारी सुनिश्चित की जाती है। वर्तमान में इन मायका सेंटरों में 11 गर्भवती महिलाएं सुरक्षित चिकित्सकीय निगरानी में रह रही हैं। पहले जहां दुर्गम रास्तों, परिवहन की कमी और दूरी के कारण समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलना कठिन था, वहीं अब महिलाओं को प्रसव पूर्व सुरक्षित वातावरण और विशेषज्ञ देखभाल उपलब्ध हो रही है। इससे संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिला है तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।

*स्वस्थ नारायणपुर की ओर मजबूत कदम*

नारायणपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में हो रहे ये प्रयास केवल योजनाओं के सफल क्रियान्वयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शासन की उस संवेदनशील सोच का परिचायक हैं जिसमें प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रोजेक्ट धड़कन ने नन्हीं धड़कनों को नया जीवन दिया है, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान ने हजारों ग्रामीणों तक उपचार पहुंचाया है और मायका सेंटरों ने दूरस्थ अंचलों की माताओं को सुरक्षित मातृत्व का भरोसा दिया है।

इन पहलों ने यह सिद्ध कर दिया है कि जब प्रशासनिक प्रतिबद्धता, स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जनसहभागिता एक साथ कार्य करती है, तब दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के मार्ग में बाधा नहीं बनतीं। आज नारायणपुर स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐसा मॉडल बनकर उभर रहा है, जहां हर बच्चे की मुस्कान, हर मां की सुरक्षा और हर नागरिक का स्वास्थ्य प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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