
बस्तर संभाग के कोण्डागांव में ही होता हैं देव राखी 700 वर्ष पुराना अनोखा परंपरा
रक्षाबंधन पर्व के एक दिन पूर्व 26 अगस्त को कोण्डागांव नगर में वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार देव राखी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ग्राम पटेल, पुजारी, सिरहा, गायता, माझी और ग्रामीणों की उपस्थिति में नगर के विभिन्न देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र बांधा गया और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
देव राखी परंपरा के संबंध में देव भगत नरपति पटेल ने बताया कि यह परंपरा कोण्डागांव नगर की बसाहट के समय से चली आ रही है। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार लोग रक्षाबंधन के अवसर पर एक-दूसरे को राखी बांधते हैं, उसी प्रकार सबसे पहले अपने आराध्य देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा है। प्रकृति और देवी-देवताओं के प्रति आस्था को व्यक्त करने वाली यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।
उन्होंने बताया कि देव राखी के तहत सबसे पहले माता गुड़ी, माउली गुड़ी, लालमन कुंवर और भंगाराम सहित बाजार क्षेत्र में स्थापित देवी-देवताओं को राखी बांधी जाती है। इसके बाद राम मंदिर, उमराव मंदिर, चौरासी गुड़ी, दंवरी वाले समिया मंदिर और माउली मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है। अंत में माता पुजारी सिरहा के स्थान पर देव राखी बांधने की परंपरा पूरी की जाती है।
देव राखी कार्यक्रम में माता पुजारी सिरहा श्यामचरण निषाद, ग्राम पटेल कन्हैया लाल कौशिक, देव भगत एवं नगरपालिका अध्यक्ष नरपति पटेल, माटी पुजारी बुधमन कोर्राम, गायता आसमन कोर्राम, ग्राम देहारी साधूराम कोर्राम सहित अन्य ग्रामीण शामिल हुए।
देव राखी के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है रक्षा सूत्र।
देव राखी में उपयोग होने वाला रक्षा सूत्र सामान्य बाजार की राखी से अलग होता है। इसे गांडा समाज के लोगों द्वारा विशेष रूप से तैयार किया जाता है। इसमें रुई और धागे का उपयोग कर पारंपरिक तरीके से राखी बनाई जाती है। मान्यता है कि देवी-देवताओं को यही पारंपरिक रूप से तैयार किया गया शुद्ध रक्षा सूत्र अर्पित किया जाता है।
नरपति पटेल ने बताया कि कोण्डागांव क्षेत्र की 22 पाली के देवी-देवताओं के लिए भी देव राखी भेजी जाती है। यह परंपरा स्थानीय संस्कृति, आस्था और सामुदायिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। उन्होंने बताया कि देव राखी का आयोजन श्रावण मास की तिथि के अनुसार ग्रामीणों और परंपरा से जुड़े लोगों की सहमति से तय किया जाता है। रक्षाबंधन पर्व से पहले देवी-देवताओं को रक्षा सूत्र अर्पित कर क्षेत्र की रक्षा और मंगल कामना की जाती है।

रक्षाबंधन से पहले कोण्डागांव में निभाई गई देव राखी परंपरा, देवी-देवताओं को अर्पित किया गया रक्षा सूत्र">







