
“आज की कल्पना, कल का निर्माण—विद्यार्थियों के सपनों से बनेगा विकसित भारत”
कोटा:— भारत सरकार के सेवा एवं सुशासन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत विकासखंड कोटा में ‘मेरे सपनों का भारत’ विषय पर विकासखंड स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोटा में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और विचारों के माध्यम से भारत के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना प्रस्तुत की।
कार्यक्रम का आयोजन विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं समग्र शिक्षा कार्यालय, कोटा के तत्वावधान में किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए चित्रकला और भाषण के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया कि वे आने वाले भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं।
चित्रों में दिखाई दिया स्वच्छ और आत्मनिर्भर भारत
चित्रकला प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति को कागज पर रंगों के माध्यम से उतारा। किसी चित्र में स्वच्छ एवं सुंदर भारत की तस्वीर नजर आई तो किसी ने पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और जल संरक्षण का संदेश दिया।
विद्यार्थियों ने शिक्षा, डिजिटल तकनीक, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और वैज्ञानिक प्रगति को भी अपने चित्रों का विषय बनाया।
रंगों से सजे इन चित्रों में विद्यार्थियों की कल्पना के साथ-साथ देश के भविष्य को लेकर उनकी सोच भी दिखाई दी।
उनके चित्रों ने यह संदेश दिया कि विकसित भारत केवल आर्थिक प्रगति का नाम नहीं, बल्कि स्वच्छता, शिक्षा, समानता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी से भी जुड़ा हुआ है।
भाषण में गूंजा राष्ट्र निर्माण का संकल्प
भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, युवाओं की भूमिका, विज्ञान एवं तकनीक, सामाजिक समानता और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।
विद्यार्थियों ने कहा कि देश की वास्तविक ताकत उसके युवा और विद्यार्थी हैं। यदि आज की पीढ़ी शिक्षा के साथ जिम्मेदारी और अनुशासन को अपनाए तो आने वाले समय में भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
विद्यार्थियों ने अपने भाषणों के माध्यम से स्वच्छ, शिक्षित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और सामाजिक रूप से समान भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों में अपनी बात रखने का उत्साह और आत्मविश्वास भी देखने को मिला।
प्रतिभा को मिला मंच, बढ़ा आत्मविश्वास
आयोजकों के अनुसार इस तरह की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में केवल प्रतिस्पर्धा की भावना ही विकसित नहीं करतीं, बल्कि उन्हें अपनी सोच और कल्पना को व्यक्त करने का अवसर भी देती हैं। चित्रकला और भाषण जैसे आयोजनों से बच्चों में रचनात्मक चिंतन, अभिव्यक्ति कौशल, आत्मविश्वास, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक जागरूकता विकसित होती है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि विकसित भारत की नींव केवल योजनाओं और संसाधनों से नहीं, बल्कि आज के विद्यार्थियों की सोच, शिक्षा, प्रतिभा और जिम्मेदारी से मजबूत होगी। आज के विद्यार्थी ही आने वाले समय में देश के जिम्मेदार नागरिक और परिवर्तन के वाहक बनेंगे।
सपनों से संकल्प तक, संकल्प से विकसित भारत तक
‘मेरे सपनों का भारत’ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की कल्पनाओं ने यह स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी अपने देश को केवल विकास की दौड़ में आगे बढ़ते हुए नहीं, बल्कि स्वच्छ, शिक्षित, समान, आत्मनिर्भर, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील और तकनीकी रूप से सशक्त राष्ट्र के रूप में देखना चाहती है।
“कागज पर उतरे सपने, शब्दों में दिखा विश्वास—विद्यार्थियों के संकल्प से बनेगा विकसित भारत खास।”

रंगों और शब्दों में सजा ‘मेरे सपनों का भारत’ कोटा में विकासखंड स्तरीय चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने दिखाई विकसित भारत की कल्पना">







