गौरेला पेण्ड्रा मरवाही, :—पर्यटन को बढ़ावा देने के उददेश्य से मकर संक्रांति के अवसर पर जिला प्रशासन के सहयोग से बनमनई इको केयर फाउंडेशन द्वारा पर्यटन क्षेत्र लमना गांव स्थित विलेज वेज स्टे में ट्राइबल फूड फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जहां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक जीवनशैली, खान-पान और लोक कलाओं की अमिट छाप छोड़ी गई। फेस्टिवल का मुख्य आकर्षण पर्यटन समिति द्वारा मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया गया पारंपरिक भोजन रहा। पर्यटकों को सरई (साल) के पत्तों पर बनी प्रसिद्ध पान रोटी और छत्तीसगढ़ की पहचान अमटहा सब्जी परोसी गई। इसके साथ ही भाजियों की एक विस्तृत श्रृंखला ने स्वाद का जादू बिखेरा, जिनमें कुसुम भाजी, तीवरा भाजी, मुनगा भाजी, पालक भाजी, गोभी भाजी, आलू भाजी, बर्रे भाजी और भथुआ भाजी के साथ ही डुबकी कढ़ी, सूरन की कढ़ी और उड़द दाल के कुरकुरे बड़े शामिल रहे।
उत्सव का आनंद तब दोगुना हो गया जब स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वेशभूषा में गौरा-गौरी, सुआ और सैला नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। मांदर की थाप और सुआ गीतों की गूंज पर वहां मौजूद प्रतिभागी और पर्यटक भी खुद को रोक नहीं पाए और झूमते हुए नृत्य का आनंद लिया। भोजन और संस्कृति के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष ट्रैकिंग का आयोजन किया गया। पर्यावरणविद् संजय पयासी के नेतृत्व में प्रतिभागियों ने झोझा वॉटरफॉल तक की यात्रा की। इस दौरान पर्यटकों ने झोझा के ऊपरी हिस्से में स्थित तीन झरनों तक ट्रेकिंग की और क्षेत्र की जैव-विविधता से परिचित हुए। खासतौर पर यहां पाई जाने वाली सबसे बड़ी तितली ब्लू मॉरमॉन, स्टाफ़ सर्जेंट,कमांडर, हेज ब्लू तितली भी देखने को मिली।








