Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

रायपुर:–छत्तीसगढ़ शासन विष्णु देव साय माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ का गणतंत्र दिवस संदेश

रायपुर:—-जहाँ तक मेरी नजरें जा रही हैं, हर तरफ तिरंगे की शान दिख रही है। माँ भारती की हर संतान उल्लास से भरी हुई दिखती है। हर नागरिक के हृदय में राष्ट्रप्रेम हिलोरे ले रहा है। हर नागरिक के भीतर राष्ट्र निर्माण के संकल्प की ज्योति जल रही है। माँ भारती के ऐसे वीर संतानों का गणतंत्र दिवस के शुभअवसर पर मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूँ।
आज का दिन राष्ट्रीय पर्व की खुशियां मनाने का दिन है। आज का दिन राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले हमारे महापुरुषों को याद करने का दिन है। हम सब कृतज्ञ हैं, उन सभी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति जिन्होंने आजादी के लिए कठिन संघर्ष किया और भारत को दुनिया का सबसे बड़ा गणतंत्र बनाया।
आज के दिन हम अपने संविधान निर्माताओं का स्मरण करते हैं। बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया हमारा संविधान बाबा गुरु घासीदास जी द्वारा दिये गये मनखे-मनखे एक समान के संदेश को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। भारतीय परंपरा में तुलसीदास और कबीरदास जैसे महान संतों ने राजव्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सबसे ऊपर रखा था। हमारा संविधान हर नागरिक को इसका अधिकार प्रदान करता है।

भारतीय गणतंत्र ने एक ऐसा खुला समाज बनाया है, जिसमें हर नागरिक राष्ट्र निर्माण के लिए अपने विचार रख सकता है। आज के दिन देश के सभी नागरिक संविधान द्वारा प्रदत्त इन अधिकारों का उत्सव मनाते हैं।

अभी हमने राज्य स्थापना का रजत महोत्सव मनाया है। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमें छत्तीसगढ़ राज्य की सौगात दी थी। हमने उनके जन्मशताब्दी वर्ष को अटल निर्माण वर्ष के रूप में मनाया है।

रजत जयंती के मौके पर संविधान के मंदिर हमारे विधानसभा के नये भवन का लोकार्पण यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों सम्पन्न हुआ है।

हमारी लोकतांत्रिक आस्था का प्रतीक यह भवन सही मायने में छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतिनिधित्व करता है। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से समृद्ध इस भवन की वास्तुकला में छत्तीसगढ़ की माटी का प्रतिबिम्ब झलकता है।

25 वर्ष पूर्व रायपुर के राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में हमारी विधानसभा का पहला सत्र आयोजित हुआ था। राज्य के साथ ही विधानसभा ने भी अपनी समृद्ध परंपरा की रजत जयंती मनाई है। यहां ऐसी अनेक लोकतांत्रिक परंपराएं स्थापित हुईं जिनका अनुकरण अन्य राज्यों की विधानसभा ने भी किया।

इस वर्ष हमने राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् की 150वीं जयंती भी मनाई। हमने नवनिर्मित विधानसभा भवन में राष्ट्र निर्माण में वन्दे मातरम् के योगदान पर विशेष चर्चा भी की।

सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के सीतामढ़ी हरचौका तक प्रदेश के हर कोने में लोगों ने वन्दे मातरम् का सस्वर गान किया। माँ भारती की प्रशंसा में लिखे गये हमारे राष्ट्रगीत का यह सम्मान बंकिम दा को सच्ची श्रद्धांजलि है।

यह वर्ष डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जी का 125 वां जयंती वर्ष भी है। एक राष्ट्र, एक निशान, एक विधान के माध्यम से उन्होंने माँ भारती की अखंडता के लिए बलिदान दिया। जब जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाई गई तो यह राष्ट्र की ओर से डॉ. मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि थी।

इस बार हमने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर धरती आबा भगवान श्री बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती भी मनाई।

भगवान श्री बिरसा मुंडा ने जनजातीय समाज में आत्मगौरव का भाव जगाया। उन्होंने ब्रिटिश शोषण और औपनिवेशिक कानूनों के विरुद्ध कड़ा संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया।

छत्तीसगढ़ की धरती भी ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध जनजातीय विद्रोहों की गवाह रही है। स्वतंत्रता संग्राम में जंगल सत्याग्रह के माध्यम से जनजातीय नायकों ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
छत्तीसगढ़ के जनजातीय नायकों के आजादी की लड़ाई में किये गये बलिदान की कहानी हम डिजिटल माध्यम से सुना रहे हैं। शहीद वीरनारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर किया। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है।

राष्ट्र की अस्मिता के लिए बलिदान देने वाले हमारे जनजातीय नायकों के चरित्र को दिखाने वाला यह म्यूजियम आज की पीढ़ी के लिए तीर्थस्थल की तरह है।

यहां बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं और अपने नायकों के प्रति श्रद्धा भाव से भर जाते हैं।

शहीदों की चिताओं पर जुड़ेंगे हर बरस मेले । वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा ।।

आज के दिन हम अभिनंदन करते हैं, अपने वीर जवानों का, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर अपनी धरती को माओवाद के खतरे से मुक्त करने का बीड़ा उठाया।

माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र को बड़ी चुनौती है। इनकी आस्था संविधान में नहीं, राष्ट्र की अस्मिता में नहीं, राष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक चिन्हों में नहीं। इस कैंसर की तरह व्याधि का उपाय यही है कि इसे जड़ से नष्ट किया जाए।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में हमने सुनियोजित रणनीति अपनाकर माओवादियों को चुनौती दी।

हमारे जवानों ने रात-दिन कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में हर पल खतरे का सामना करते हुए एरिया डामिनेशन किया और अपने साहस तथा शौर्य से हर लक्ष्य को प्राप्त किया।

माओवादी हिंसा को समाप्त करने का यह बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है। इसी साल के मार्च महीने तक हम माओवाद को इस सुंदर धरती से जड़मुक्त कर देंगे।
खुशी की बात यह है कि अनेक लोग जो रास्ता भटक चुके थे, वे अब लोकतंत्र की मुख्यधारा में वापस लौट रहे हैं।
उन्होंने हथियार रख दिये और अपने हाथों में बाबा साहेब का संविधान थामा। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के देश में यह सबसे सुंदर तस्वीर देखने में आई और इसने संविधान की सत्यमेव जयते की भावना को पुष्ट किया।

कुछ महीनों पहले जब मैं एक कार्यक्रम में भाग लेने जगदलपुर गया था। वहां मैं बस्तर कैफे गया, यहां आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं अब कैफे संभालती हैं। हिंसा की राह छोड़कर लोगों की सेवा की राह में आने से उनके चेहरे पर जो खुशी मैंने देखी, उसे बयान करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं है।

हर काली अंधेरी रात के बाद नई सुबह होती है। अब नक्सलमुक्त क्षेत्र में विकास का सूरज दमक रहा है। बच्चों के चेहरे से भय का साया हट गया है, उनके हाथों में किताबें हैं। बस्तर को इस नये रूप में देखना बहुत अच्छा लगता है।

किसी राज्य की रजत जयंती आत्मावलोकन का अवसर भी है। इसकी कसौटी यह है कि पुरखों द्वारा बताये गये आदर्शों पर हम कितने खरे उतर पाए।

छत्तीसगढ़ का समाज अपने पुरखों द्वारा दिखाये राह पर चलते हुए सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटा हुआ है।

भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौरान छत्तीसगढ़ में विद्रोह की मशाल शहीद वीरनारायण सिंह जी जैसे शूरवीरों ने जलाई। उन्होंने न केवल अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन का विरोध किया, अपितु एक ऐसी वैकल्पिक व्यवस्था की राह भी दिखाई, जो अंत्योदय के प्रति गहरी संवेदना रखती है।

उन्होंने जमाखोरी का विरोध कर अकाल के दौरान भूख से पीड़ित लोगों के पेट की ज्वाला शांत की। छत्तीसगढ़ का पीडीएस मॉडल शहीद वीरनारायण सिंह जी को सच्ची श्रद्धांजलि है।

हमारे यहां कहावत है कि- दुब्बर बर दू असाढ़। इस कहावत से किसान भाइयों की दिक्कतें स्पष्ट रूप से समझ आती है कि खेती-किसानी करना कितना कठिन कार्य है।
राज्य बनने के बाद हमारी सबसे बड़ी चुनौती थी, अन्नदाता का सुख और संतोष । इस रजत जयंती की यात्रा में हमने किसान भाइयों की मुस्कान उन्हें लौटाई है। आज छत्तीसगढ़ के किसान को धान का सबसे अच्छा मूल्य मिल रहा है।

हमारे ग्रामीण परिवेश में समृद्धि का आंकलन घरों के कोठार से होता है। कोठार अनाज से भरे हों, तो समझ जाइये कि समृद्धि हर ओर फैली हुई है।

हमारे प्रदेश का कोठार अर्थात हमारा धान का कटोरा, धान से लबालब है। राज्य बनने के बाद व्यवस्थित रूप से धान की खरीदी हुई, जब धान खरीदी आरंभ हुई तो इसका आंकड़ा 5 लाख मीट्रिक टन था, पिछली बार खरीदी का यह आंकड़ा 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। हमने पिछले दो साल में किसान हितैषी योजनाओं के माध्यम से किसानों के खाते में डेढ़ लाख करोड़ रुपए अंतरित किये हैं।

हमारी सरकार किसानों के हित में फैसले लेती है। अटल सिंचाई योजना के तहत वर्षों से अपूर्ण और लंबित पड़ी 115 सिंचाई योजनाओं को पूर्ण करने हमने 28 सौ करोड़ रुपए की योजना की मंजूरी दी है।

प्रधानमंत्री ने दीवाली के मौके पर जो जीएसटी रिफार्म्स किये, उसका सबसे अधिक लाभ हमारे किसान भाइयों को मिला है। ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण काफी सस्ते हो गये। कृषि मशीनरी बेचने वाले कारोबारियों के लिए तो काफी व्यस्तता का समय रहा।

खेती-किसानी से संबंधित उत्पादों पर कर घटाने का सबसे बड़ा लाभ यह हो रहा है कि हमारे किसान भाई आधुनिक खेती को तेजी से अपना रहे हैं।

हमारे छत्तीसगढ़ का चावल 120 देशों में निर्यात होता है। लागत घटने और सरकार द्वारा अच्छा मूल्य मिलने से किसानों के लिए अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी रखने में काफी मदद मिलती है।

हमारा देश अन्य देशों के साथ व्यापार वार्ता भी कर रहा है। यह वार्ता महाशक्तियों के साथ भी हो रही है। प्रधानमंत्री जी ने स्पष्ट कह दिया है कि जो भी व्यापार समझौते होंगे, उनमें किसानों का किसी तरह से अहित नहीं होने दिया जाएगा।

डबल इंजन की सरकार किसानों के मुद्दे पर कभी झुकती नहीं, किसानों के मुद्दे पर सिर उठाकर खड़ी रहती है और किसान भाइयों को उनका हक दिलाती है।

किसानों के साथ ही श्रमिक भाइयों की समृद्धि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हमारी सरकार ने दो वर्षों में 29 लाख से अधिक श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से 8 सौ करोड़ रुपए से अधिक राशि अंतरित की है।

महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य को देखते हुए रात की पाली में भी महिला श्रमिकों के सशर्त नियोजन का प्रावधान किया गया है। 2 वर्ष में ही कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत बीमित कामगारों की संख्या 4 लाख 60 हजार से बढ़कर 6 लाख 26 हजार हो गई है। केंद्र सरकार ने जिन 29 पुराने श्रम कानूनों की जगह 4 श्रम संहिताएं लाई हैं, श्रमिक भाइयों के हित में उनका तेजी से क्रियान्वयन किया जा रहा है।

हमारी सरकार ने दो साल पूरे किये हैं। मोदी जी की गारंटी को पूरा करते हुए हमने पहले कैबिनेट की बैठक में ही 18 लाख आवास स्वीकृत करने का निर्णय लिया। प्रदेश में अब तक 26 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किये जा चुके हैं।

लोगों को आवास उपलब्ध कराने का यह काम हम मिशन मोड में कर रहे हैं। मुझे आपको यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि हर दिन लगभग 2 हजार आवास प्रदेश में बनाये जा रहे हैं।

यह गति पूरे देश में सबसे अधिक है। आप सभी छत्तीसगढ़ में हो रही आवास क्रांति के गवाह हैं। खप्पर वाली छतें अब बीते दिन की बात हो गई, अब हर घर पक्का और बुनियादी सुविधा से युक्त है, जहां जलजीवन मिशन से शुद्ध जल मिल रहा है।

राज्य स्थापना से पूर्व प्रदेश के लोगों को घंटों पॉवर कट का सामना करना पड़ता था। विद्युत उत्पादन के मामले में हम देश में अभी दूसरे नंबर पर है, और पहले नंबर की ओर तेजी से अग्रसर हैं। आज प्रदेश के बीपीएल परिवारों को एकल बत्ती योजना के तहत निःशुल्क बिजली तथा शेष परिवारों को चौबीस घंटे रियायती दरों पर बिजली मिल रही है।

एनर्जी सेक्टर में हम विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ की जरूरतों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं, इसी क्रम में प्रधानमंत्री जी ने सीपत में 9790 करोड़ रुपए के सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी है। डबल इंजन की सरकार का फोकस शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य को लेकर है और इसी के अनुरूप कोरिया, सरगुजा, बलरामपुर जैसे जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन पर काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री सौर घर मुफ्त बिजली योजना में केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार की सब्सिडी भी मिल रही है, जिसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने अक्षय ऊर्जा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। हमने गेल से भी एमओयू किया है, जिसके तहत गैस आधारित उर्वरक परियोजना मुख्य रूप से 12.7 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाले यूरिया उत्पादन प्लांट पर केन्द्रित है।
नक्सलवाद की वजह से बस्तर में योजनाओं का क्रियान्वयन धीमा रह गया था लेकिन अब इसने रफ्तार पकड़ ली है। नक्सलवाद ने लोगों को बेघर किया है। हम हथियार छोड़ मुख्यधारा में लौटने वाले लोगों को पक्का घर दे रहे हैं। इसके लिए 15 हजार आवास हमने स्वीकृत किये हैं। पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए हम अब तक 33 हजार 217 आवास स्वीकृत कर चुके हैं।
हमने छत्तीसगढ़ महतारी को संवारने का संकल्प लिया है। छत्तीसगढ़ महतारी को गढ़ने में, संवारने में सबसे ज्यादा भूमिका हमारी माताओं-बहनों की है। मुझे खुशी है कि महिलाओं के सम्मान का पूरा ध्यान रखते हुए हमारी सरकार महतारी वंदन योजना के माध्यम से करीब 70 लाख महिलाओं को प्रति माह
एक-एक हजार रुपए की सम्मान राशि प्रदान कर रही है। अब तक 23 किश्तों में 14 हजार 948 करोड़ रुपए की राशि माताओं-बहनों के खाते में भेज चुके हैं।
प्रधानमंत्री जी ने अगले दस सालों में देश को मैकाले की मानसिकता से पूरी तरह से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। भारत एक समय विश्वगुरु रहा लेकिन मैकाले की मानसिकता ने समाज पर ऐसा असर डाला कि लोग हर विचार को पश्चिमी नजरिये से देखने लगे और अपनी भारतीय संस्कृति के आदर्शों को भूलते गये। इस मानसिकता को भारतीय मूल्यों से युक्त शिक्षा से बदला जा सकता है।
जब हमने सरकार का कामकाज संभाला तो हमारे सामने एक बड़ी चुनौती शिक्षा को लेकर ही थी। यह दो कारणों से थी, पहला तो कोविड की वजह से जो ऑनलाइन क्लासेज हुईं, उनसे बच्चों को काफी लर्निंग लॉस हुआ। बच्चों को पढ़ने-लिखने और गणित की सामान्य क्रियाएं करने में भी परेशानी होती थी, इस लर्निंग लॉस को ठीक करना बड़ी चुनौती थी। इस पर हमने विशेष रूप से मेहनत की।

दूसरी इससे भी बड़ी समस्या दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी की थी। 453 ऐसे स्कूल थे जहां एक भी शिक्षक नहीं थे और 1428 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे थे जबकि राष्ट्रीय छात्र-शिक्षक अनुपात की तुलना में हमारे प्रदेश में इसका अनुपात अच्छा है। हमने युक्तियुक्तकरण के माध्यम से शहरों के अतिशेष शिक्षकों की ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापना की और इस तरह से यह समस्या दूर हुई।

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

और भी पढ़ें

📝 संपादक की जानकारी

संपादक: फिरोज खान

पता: बिलासपुर, छत्तीसगढ़ - 495001

संपर्क नंबर: 📞 98271 37773 📞 97131 37773 📞 98279 60889

ईमेल: firojrn591@gmail.com


वेबसाइट में प्रकाशित खबरों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है समाचार की विषयवस्तु संवाददाता के विवेक पर निर्भर यह एक हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश और दुनिया की खबरें प्रकाशित की जाती हैं। वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी समाचार से संबंधित कानूनी विवाद की स्थिति में केवल बिलासपुर न्यायालय की ही मान्यता होगी।

WhatsApp