
रतनपुर…दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत,निरंतर सीखना, आत्म-अनुशासन, और असफलता से सीखने की क्षमता , जो आपको छोटे लक्ष्यों को पूरा करने और लगातार आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित करती है,जिसमें खुद पर विश्वास और सही लोगों के साथ रहना यह प्रेरणा किसी बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि अपनी आंतरिक इच्छा से कामयाबी मिलती है। यह किसी फिल्म की लाईने नही यह लाईन है उस प्रतिभाशाली युवक दिव्यांशु जायसवाल की जिन्होंने अपनी सफलता की कहानी खुद लिखी और लिखी भी क्या रतनपुर के लिए एक स्वर्णिम ईतिहास रतनपुर के पहले यूपीएससी मे चयनित होने वाले छात्र बनकर सदियों तक उनकी सफलता की कहानी हर जुबां पर होगी, सभी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी मे शामिल होने वाले प्रतिभागियों के लिए आदर्श, प्रेरणा स्रोत और मार्गदर्शक बनकर हमेशा माता पिता को गौरव दिलाते रहेंगे.। हम बात कर रहे है दिव्यांशु जायसवाल की जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की आयोजित सिविल सेवा परीक्षा-2023 के आधार पर माय भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार में **असिस्टेंट डायरेक्टर के क्लास-1 पद पर नियुक्ति पाई है। यह उल्लेखनीय सफलताउन्हे पांचवे प्रयास मे मिला जहा उनका वैकल्पिक विषय प्रबंधन था।दिव्यांशु बाल्कायकाल से सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर का एक होनहार एवं प्रतिभाशाली छात्र रहा आगे की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), मल्हार, बिलासपुर से पूर्ण की।उन्होंने आईआईटी (IIT) रुड़की से बी.टेक में इंस्टीट्यूट मेडल प्राप्त किया तथा आईआईटी (IIT) बॉम्बे से एम.टेक में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सिल्वर मेडल से सम्मानित किए गए थे।वर्तमान में वे एक स्वतंत्र डेटा साइंटिस्ट के रूप में कार्यरत थे। दिव्यांशु ने बताया कि उनके नानाजी स्वर्गीयbके.एस. गमे से प्रेरित होकर उन्होंने निजी क्षेत्र से सार्वजनिक सेवा की ओर रुख किया। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने माँ महामाया देवी की कृपा, माता-पिता के आशीर्वाद,परिवार और मित्रों के अटूट सहयोग को दिया दिव्यांशु,वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सुनील जायसवाल एवं डॉ. नीलिमा जायसवाल के सुपुत्र हैं। उनकी इस उपलब्धि पर सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर, सहित क्षेत्र मे हर्ष का माहौल है.रतनपुर के गौरव को बढाने लिए हर एक व्यक्ति दिव्यांशु की सफलता पर आनंदित है






