
*गरियाबंद*:- जनता से त्याग की अपील और पूंजीपतियों को लाभ – यही भाजपा की असली नीति”
सोनवानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल के दिनों में देशवासियों से सोना नहीं खरीदने, पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, खाने के तेल में संयम बरतने तथा विदेश यात्राओं में कटौती जैसी अपीलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोनवानी ने कहा कि यह अपीलें देश की आर्थिक विफलताओं, बढ़ती महंगाई और गिरती आमदनी को छिपाने का प्रयास हैं।
आज देश का मध्यम वर्ग, किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी और युवा पहले से ही आर्थिक दबाव में जी रहे हैं। महंगाई लगातार बढ़ रही है, रोजगार के अवसर घट रहे हैं, घरेलू बचत कम हो रही है और आम आदमी की क्रय शक्ति कमजोर पड़ती जा रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री का जनता से बार-बार “त्याग” और “संयम” की अपील करना यह दर्शाता है कि सरकार अपनी आर्थिक नीतियों की विफलता स्वीकार करने के बजाय उसका बोझ सीधे जनता पर डालना चाहती है।
जब देश में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार भारी टैक्स वसूल रही है, तब आम जनता से पेट्रोल कम उपयोग करने की अपील करना क्या उचित है? यदि सरकार वास्तव में जनता को राहत देना चाहती है, तो सबसे पहले पेट्रोल-डीजल पर लगाए गए अत्यधिक केंद्रीय करों को कम करे। भाजपा सरकार ने पिछले वर्षों में ईंधन पर टैक्स लगाकर लाखों करोड़ रुपये कमाए, लेकिन उसका लाभ आम नागरिकों तक नहीं पहुंचा।
खाने के तेल की कीमतों को लेकर सोनवानी जी ने कहा कि सरकार अपनी आयात नीति और कृषि नीति की विफलताओं को छिपा रही है। खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि से गरीब और मध्यम वर्ग की रसोई पर सीधा असर पड़ा है। सरकार यदि गंभीर है, तो किसानों को प्रोत्साहन देकर घरेलू उत्पादन बढ़ाए, जमाखोरी पर कार्रवाई करे और आम जनता को राहत दे। केवल अपील करने से समस्या हल नहीं होगी।
सोना खरीदने को लेकर प्रधानमंत्री की अपील पर भारत में सोना केवल विलासिता नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का माध्यम है। भारतीय महिलाएं सदियों से सोने को बचत और सुरक्षा के रूप में देखती हैं। सरकार को यह समझना चाहिए कि जब बैंकिंग व्यवस्था और निवेश के अवसरों पर भरोसा कम होता है, तब लोग पारंपरिक बचत की ओर जाते हैं। जनता को दोष देने के बजाय सरकार को अर्थव्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।
विदेश यात्राओं में कटौती की अपील पर सोनवानी ने कहा कि यह सबसे बड़ा विरोधाभास है। एक ओर प्रधानमंत्री स्वयं दुनिया के अनेक देशों की यात्राएं करते रहे हैं, दूसरी ओर आम नागरिकों से विदेश यात्रा कम करने की सलाह दी जा रही है।सोनवानी ने कहाँ कि विदेश यात्रा आज शिक्षा, रोजगार, व्यापार, चिकित्सा और पर्यटन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुकी है। सरकार को युवाओं के अवसर बढ़ाने चाहिए, न कि उन्हें सीमित करने वाली मानसिकता प्रस्तुत करनी चाहिए।
भाजपा सरकार “आत्मनिर्भरता” के नाम पर जनता से लगातार त्याग मांग रही है, जबकि बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट घरानों को कर छूट, रियायतें और सुविधाएं दी जा रही हैं। आम आदमी महंगाई से परेशान है, लेकिन सरकार के पास ठोस आर्थिक समाधान नहीं हैं।
सोनवानी ने केंद्र सरकार से मांग की कि—
पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय करों में तत्काल कटौती की जाए।
खाद्य तेलों और आवश्यक वस्तुओं की कीमत नियंत्रित करने के लिए प्रभावी नीति लागू की जाए।
रोजगार सृजन और आमदनी बढ़ाने पर ध्यान दिया जाए।
रुपये की गिरती स्थिति और बढ़ते आयात बिल को नियंत्रित करने के लिए पारदर्शी आर्थिक रोडमैप पेश किया जाए।
जनता से प्रतीकात्मक अपीलों के बजाय ठोस राहत पैकेज घोषित किए जाएं। देश की जनता अब केवल भाषण और अपील नहीं, बल्कि वास्तविक आर्थिक राहत चाहती है। प्रधानमंत्री को जनता से त्याग मांगने से पहले यह बताना चाहिए कि पिछले बारह वर्षों में उनकी सरकार की आर्थिक नीतियों से आम नागरिक को क्या लाभ मिला।
अंत में सोनवानी ने कहा कि देश का नागरिक राष्ट्रहित में हमेशा योगदान देने को तैयार रहता है, लेकिन सरकार का कर्तव्य भी है कि वह जनता को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से राहत दे। केवल अपीलों से अर्थव्यवस्था नहीं चलती; उसके लिए दूरदर्शी नीति, जवाबदेही और जनहितकारी निर्णय आवश्यक होते हैं।

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