
2.73 करोड़ के सौंदर्यीकरण कार्य में अनियमितता की शिकायत, एएसआई महानिदेशक से जांच की मांग
धरोहर बचाओ की मांग: गज किला तालाब के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप
रतनपुर के ऐतिहासिक गज किला परिसर स्थित प्राचीन तालाब के सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय संस्था मोरध्वज वेलफेयर फाउंडेशन ने निर्माण कार्य में अनियमितता और तालाब के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए मामले की शिकायत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक तक पहुंचाई है।
सौंदर्यीकरण के नाम पर तालाब का क्षेत्रफल घटाने का आरोप
करीब 2 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से गज किला परिसर के प्राचीन तालाब में सौंदर्यीकरण एवं पाथवे निर्माण का कार्य किया जा रहा है। मोरध्वज वेलफेयर फाउंडेशन का आरोप है कि इस कार्य के दौरान तालाब के मूल स्वरूप में बदलाव किया जा रहा है और उसका क्षेत्रफल कम किया जा रहा है।
टेंडर नियमों की अनदेखी, पुराने पत्थरों के उपयोग का दावा
संस्था का कहना है कि निर्माण कार्य में टेंडर की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। जहां नए पत्थरों का उपयोग किया जाना था, वहां पुराने पिचिंग के पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे निर्माण की गुणवत्ता और ऐतिहासिक संरचना दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
फाउंडेशन ने पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, रायपुर मंडल के अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. काली मिथू को लिखित शिकायत देकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। संस्था का आरोप है कि शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
महानिदेशक को भेजी शिकायत, उच्चस्तरीय जांच की मांग
कार्रवाई नहीं होने पर अब संस्था ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक, नई दिल्ली को शिकायत भेजी है। शिकायत में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है।
ऐतिहासिक धरोहर संरक्षण को लेकर बढ़ी चिंता
मोरध्वज वेलफेयर फाउंडेशन का कहना है कि गज किला और इससे जुड़ा प्राचीन तालाब रतनपुर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान हैं। ऐसे में इनके मूल स्वरूप से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जा सकती

अब देखना होगा कि राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत पहुंचने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। फिलहाल यह मुद्दा रतनपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

गज किला के प्राचीन तालाब पर उठे सवाल, मूल स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप">






