
बिलासपुर /कोरबा:—कोरबा जिले के सिंघाली भूमिगत खदान क्षेत्र में भूविस्थापित किसानों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर किसानों ने 25 जून से आउटसोर्सिंग कंपनी टीएमसी मिनरल रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की घोषणा की है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव-गांव बैठकों का दौर जारी है।
कोयला धानी भूविस्थापित किसान संघ और क्षेत्र क्रमांक-6 के जनपद सदस्य द्वारा 11 जून को एसईसीएल कोरबा प्रबंधन सहित संबंधित विभागों को 8 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। किसानों का आरोप है कि उनकी मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
17 जून को कटघोरा एसडीएम कार्यालय में जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई थी। लेकिन यह वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद किसानों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया।
किसानों की प्रमुख मांगों में अधिग्रहित भूमि से प्रभावित लोगों को रोजगार और मुआवजे की पूरी जानकारी, लालपुर-भेजीनारा सड़क का संरक्षण, स्थायी पेयजल व्यवस्था, निस्तारी तालाब की जानकारी, प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक रोजगार तथा विवादित भूमि पर कानूनी कार्रवाई शामिल हैं। इसके अलावा किसानों ने पूर्वजों के मुक्तिधाम को नुकसान पहुंचाने के मामले में भी कार्रवाई की मांग की है।
रविवार को भेजीनारा गांव में कोयला धानी भूविस्थापित किसान संघ के अध्यक्ष गजेंद्र पाल सिंह और जनपद सदस्य श्रवण सिंह तंवर के नेतृत्व में बैठक आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और किसान शामिल हुए तथा 25 जून के आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।
भूविस्थापित किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो 25 जून से शुरू होने वाला आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है। अब सभी की निगाहें एसईसीएल प्रबंधन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

सिंघाली खदान मुद्दे पर भूविस्थापित किसानों का आंदोलन तेज, 25 जून को TMC कंपनी गेट पर अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी">






