
समावेशी शिक्षा की मिसाल: दो दिव्यांग बच्चों का स्कूल में हुआ प्रवेश
घर-घर पहुंचे शिक्षक, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दिलाया शिक्षा का अधिकार
रतनपुर… राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के समावेशी शिक्षा अभियान के तहत दो विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विद्यालय से जोड़कर शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल किया गया है।
अभियान की शुरुआत
शासकीय प्राथमिक शाला जमुनाही तिलकडीह, विकासखंड कोटा के सहायक शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने अपने मित्र एवं शैक्षिक समन्वयक कमल सोनी के साथ मिलकर घर-घर जाकर विशेष आवश्यकता वाले एवं शाला से वंचित बच्चों की पहचान की। दोनों शिक्षकों ने अभिभावकों से मुलाकात कर शिक्षा के महत्व और शासन की समावेशी शिक्षा योजनाओं की जानकारी
दो बच्चों का हुआ स्कूल में प्रवेश
इस अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए। अर्जुन यादव और पुनीत कुमार लास्कर का विद्यालय में प्रवेश कराया गया। दोनों बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत की गई।
आत्मीय स्वागत और सम्मान
विद्यालय पहुँचने पर दोनों बच्चों का तिलक लगाकर, पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने अपने निजी खर्च से स्कूल बैग, पेन, कम्पास बॉक्स और अभ्यास पुस्तिकाएँ प्रदान कीं। वहीं विद्यालय की ओर से निःशुल्क यूनिफॉर्म और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई गईं।
समावेशी शिक्षा का संदेश
बच्चों को सामान्य विद्यार्थियों के साथ बैठाकर पढ़ाई के लिए प्रेरित किया गया, ताकि उनमें आत्मविश्वास और अपनत्व की भावना विकसित हो सके। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के उस संकल्प को साकार करती है, जिसमें कहा गया है कि “कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।”
शिक्षक का संदेश
इस अवसर पर शिक्षक बलदाऊ सिंह श्याम ने सहयोग के लिए कमल सोनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक शिक्षित नागरिक का दायित्व है कि वह शिक्षा से वंचित हर बच्चे को विद्यालय तक पहुँचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।रतनपुर से सामने आई यह पहल बताती है कि जब शिक्षक, अभिभावक और समाज मिलकर प्रयास करते हैं, तब हर बच्चे तक शिक्षा का अधिकार पहुँचाना संभव हो जाता है।









