धरमजयगढ़ से असलम खान की रिपोर्ट
2015 से मिल रहे आश्वासन, 2025 में फिर हुई घोषणा—लेकिन आज तक नहीं बना पुल
छाल/धरमजयगढ़:— जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड से सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क सामने आया है। क्रोंधा से खड़गांव गांव के बीच बहने वाले उफनते नाले को पार कर 51 स्कूली बच्चे हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।
बारिश के दिनों में यह रास्ता बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है। नाला उफान पर होने के बावजूद बच्चे पढ़ाई के लिए इसे पार करते हैं। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई बच्चे दो जोड़ी कपड़े लेकर स्कूल जाते हैं, ताकि नाला पार करते समय कपड़े भीग जाने पर स्कूल पहुंचकर बदल सकें।
इतना ही नहीं, करीब 5 किलोमीटर लंबी सड़क भी बारिश में कीचड़ से लथपथ हो जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल की सुविधा के अभाव में बच्चों समेत आम ग्रामीणों को रोजाना भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
आश्वासन और घोषणाएं हुईं, लेकिन पुल आज भी सपना
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2015 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय ने नाले पर पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। इसके बाद वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री बनने के बाद भी पुल निर्माण की घोषणा की गई, लेकिन आश्वासन और घोषणा के बावजूद आज तक धरातल पर पुल का निर्माण नहीं हो सका।
एक छात्र बहते-बहते बचा, खतरा बना हुआ है
ग्रामीणों ने बताया कि एक बार नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से एक छात्र बहने लगा था, जिसे बड़ी मुश्किल से बचाया गया। जब नाला उफान पर होता है, तो बच्चों को सुरक्षित घर लाने के लिए परिजनों को करीब 20 किलोमीटर लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ता है।
रायगढ़ जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते क्षेत्र के नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। ऐसे में बच्चों की परेशानी के साथ-साथ खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घोषणाओं और आश्वासनों से आगे बढ़कर जल्द से जल्द नाले पर पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि 51 मासूम बच्चों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल जाने के लिए मजबूर न होना पड़े।








