
करोड़ों की लागत से लगी स्ट्रीट लाइटें बनीं शोपीस, आस्था की नगरी में अंधेरा और जानलेवा पोल बने चिंता का कारण
रतनपुर…. प्रदेश की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रतनपुर इन दिनों अपनी स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर चर्चा में है। लगभग 3 करोड़ 54 लाख रुपये की लागत से नगर में स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लगाने की योजना पर भारी राशि खर्च की गई, लेकिन इसके बावजूद शहर के कई प्रमुख मार्ग आज भी रात के समय अंधेरे में डूबे रहते हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी न तो पर्याप्त रोशनी मिल रही है और न ही व्यवस्था सुरक्षित नजर आ रही है।
धार्मिक नगरी में अंधेरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल
रतनपुर में स्थित विश्व प्रसिद्ध मां महामाया मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सावन माह में बूढ़ा महादेव मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं। लेकिन रात के समय कई मुख्य मार्गों, चौक-चौराहों और गलियों में स्ट्रीट लाइट बंद रहने से श्रद्धालुओं, महिलाओं, बुजुर्गों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि धार्मिक और पर्यटन नगरी होने के बावजूद मूलभूत सुविधाओं की यह स्थिति चिंता का विषय है।
सिर्फ अंधेरा नहीं, अब जानलेवा भी बन रही व्यवस्था
स्ट्रीट लाइट योजना पर सवाल केवल बंद पड़ी लाइटों तक सीमित नहीं हैं। कई स्थानों पर बिजली के पोल में करंट उतरने और तकनीकी खराबी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। हाल ही में सीताराम होटल के पास लगे एक स्ट्रीट लाइट पोल से धुआं निकलने और करंट फैलने की घटना ने लोगों में दहशत पैदा कर दी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
करंट की चपेट में आ चुके हैं मवेशी, पहले भी हो चुके हैं हादसे
नगर में पहले भी करंट की चपेट में आने से मवेशियों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। वार्ड क्रमांक 6 में एक गाय की करंट लगने से मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करंट की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में किसी व्यक्ति की जान भी खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का गंभीर विषय बन गई है।
CMO ने मानी तकनीकी खामी, अध्यक्ष ने ठेकेदार पर उठाए सवाल
नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) ने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में तकनीकी खामियों की बात स्वीकार करते हुए सुधार का भरोसा दिया है। वहीं नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि उनके कार्यभार संभालने से पहले ही संबंधित ठेकेदार की अमानत राशि वापस कर दी गई थी। इन बयानों के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि कार्य में तकनीकी खामियां थीं तो गुणवत्ता की जांच किसने की और जवाबदेही किसकी तय होगी।
करोड़ों की योजना पर उठ रहे हैं पारदर्शिता के सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये सार्वजनिक धन से खर्च किए गए हैं, तब यह जानना जरूरी है कि योजना का रखरखाव कौन कर रहा है, कितनी स्ट्रीट लाइटें वर्तमान में बंद हैं और तकनीकी खराबियों को दूर करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई है। लोगों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और प्रभावी रखरखाव के अभाव में पूरी योजना का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
जनता की मांग—जांच, जवाबदेही और तत्काल सुधार
नगरवासियों ने स्ट्रीट लाइट योजना की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने, बंद पड़ी लाइटों को तत्काल चालू कराने, करंट जैसी खामियों को दूर करने तथा यदि किसी अधिकारी, एजेंसी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि धार्मिक नगरी की पहचान तभी सार्थक होगी जब श्रद्धालुओं और नागरिकों को सुरक्षित एवं बेहतर मूलभूत सुविधाएं मिलें।
निष्कर्ष
रतनपुर जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन नगर में 3.54 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई स्ट्रीट लाइट योजना यदि अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही है, तो यह केवल रखरखाव का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, गुणवत्ता नियंत्रण और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिम्मेदार विभाग इस व्यवस्था को दुरुस्त करने, तकनीकी खामियों को दूर करने और जनता के सवालों का जवाब देने के लिए कितनी जल्द ठोस कदम उठाता है।

3.54 करोड़ की स्ट्रीट लाइट योजना पर सवाल: करोड़ों खर्च के बाद भी अंधेरे में रतनपुर, व्यवस्था और जवाबदेही पर उठे गंभीर प्रश्न">








