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पानी रोकने बना था बांध, अब ग्रामीणों की सांसें रोक रहा

“संभागीय जिला ब्यूरो रवि राज रजक की रिपोर्ट”
“संभागीय जिला ब्यूरो रवि राज रजक की रिपोर्ट”

लूफा सिंचाई बांध में लगातार रिसाव से दहशत, पहाड़ के नीचे बसे गांव पर मंडरा रहा टूटने का खतरा

बेलगहना/लूफा:— कोटा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बेलगहना के समीप ग्राम लूफा में बना सिंचाई बांध इन दिनों ग्रामीणों के लिए राहत नहीं, बल्कि आफत का कारण बन गया है। पहाड़ के नीचे बने इस बांध से लगातार पानी का रिसाव होने की शिकायत सामने आ रही है। रिसाव बढ़ने के साथ ही ग्रामीणों में बांध की सुरक्षा को लेकर चिंता गहराती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसकी मरम्मत और तकनीकी जांच नहीं कराई गई तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

बांध में पानी है, लेकिन भरोसा नहीं…

ग्रामीणों के मुताबिक बांध के हिस्सों से लगातार रिसता पानी इसकी मजबूती पर सवाल खड़े कर रहा है। पहाड़ के नीचे बांध की स्थिति होने के कारण ग्रामीणों को सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि कहीं अचानक बांध का हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर पानी का तेज बहाव नीचे की ओर न आ जाए।
ग्रामीणों की मांग है कि जल संसाधन विभाग की तकनीकी टीम मौके पर पहुंचकर बांध की तत्काल जांच करे और रिसाव के कारणों का पता लगाकर स्थायी मरम्मत कराए।

जल संसाधन विभाग पर बड़ा सवाल

बांध का रिसाव दिख रहा है साहब, विभाग को क्यों नहीं दिख रहा?

बांध जैसे महत्वपूर्ण जलस्रोत की सुरक्षा केवल कागजों की निगरानी से नहीं, बल्कि जमीनी निरीक्षण और समय पर मरम्मत से सुनिश्चित होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या सामने आने के बावजूद यदि जिम्मेदार विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई तो किसी बड़े हादसे के बाद जिम्मेदारी तय करने का कोई मतलब नहीं रहेगा

“जल संसाधन विभाग पानी का हिसाब रखता रहा, बांध कब रिसने लगा इसका हिसाब रखना भूल गया

 

बांध में पानी कम हो या ज्यादा, ग्रामीणों का डर लगातार बढ़ रहा है।”

“मरम्मत का इंतजार करता बांध… हादसे का इंतजार करते जिम्मेदार?”

ग्रामीणों का सीधा सवाल

अगर बांध सुरक्षित है तो लगातार रिसाव क्यों?
अगर रिसाव सामान्य है तो तकनीकी जांच क्यों नहीं?
और अगर खतरा नहीं है तो ग्रामीणों की चिंता दूर करने विभाग मौके पर कब पहुंचेगा?

एक छोटी लापरवाही, बड़ा खतरा

पहाड़ के नीचे बांध • लगातार रिसाव • ग्रामीणों में डर • तत्काल तकनीकी जांच की जरूरत

ग्रामीणों की मांग:

👉 बांध की तत्काल तकनीकी जांच हो
👉 रिसाव वाले स्थानों की पहचान कर मरम्मत कराई जाए
👉 बांध की मजबूती की विशेषज्ञों से जांच हो
👉 संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए

“बांध की दरार छोटी हो सकती है, लेकिन खतरा बहुत बड़ा हो सकता है।”
“रिसाव को आज रोकिए, कल के हादसे को टालिए।”
“जल संसाधन विभाग जागे—लूफा बांध को हादसे का इंतजार नहीं, सुरक्षा की जरूरत है।”

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