
रतनपुर:—
स्वतंत्रता दिवस की सुनहरी सुबह… रतनपुर की हवाओं में तिरंगे की महक घुली थी। नगर की हर गली, हर चौक, मानो एक ही गीत गा रही थी — “वंदे मातरम्”। मां महामाया कॉलेज से निकली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा ने रतनपुर को तिरंगे की आभा से भर दिया।
आपको बता दे कि हाथों में लहराते 1001 फीट लंबे तिरंगे की छांव में जब हजारों कदम आगे बढ़े, तो आसमान गूंज उठा —
“भारत माता की जय” और “जय जवान, जय किसान” के नारों से।
देशभक्ति गीतों की मधुर धुनों के बीच तिरंगे की फड़फड़ाहट ने हर दिल में गर्व और बलिदान की आग जगा दी।यात्रा का समापन शहीद नूतन सोनी हायर सेकेंडरी स्कूल में हुआ। यह यात्रा केवल उत्सव नहीं थी, बल्कि शहीद नूतन सोनी जी के अदम्य साहस को सलाम थी, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
तिरंगे से पहले आस्था का दीप——-
यात्रा से पूर्व पूजनीय ताराचंद महाराज , दिव्यकांत महाराज जी और समाजसेवी विजय अग्रवाल की उपस्थिति में विधि-विधान से पूजा-अर्चना हुई। मानो देशप्रेम और आस्था का संगम एक साथ बह निकला हो।
अतिथियों के प्रेरक शब्द—-
मुख्य अतिथि, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी ने भावुक स्वर में कहा —
“यह तिरंगा हमें याद दिलाता है कि आज़ादी किसी की देन नहीं, बल्कि शहीदों के लहू की सौगात है। इसे थामना आसान है, पर इसकी आन-बान और शान में जीना ही सच्ची देशभक्ति है।”
विशिष्ट अतिथि, नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने कहा —
“आज रतनपुर ने यह साबित कर दिया कि जब युवा संकल्प लें, तो देश का भविष्य सुनहरा होता है।”
अभाविप के प्रदेश मंत्री यज्ञदत्त वर्मा, जिला संयोजक स्नेहा अग्रहरी, आयुष तिवारी, शुभम पाठक, शशांक सोनवानी और अभिषेक ने युवाओं से अमृतकाल के पंच प्रण को अपनाने और भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का आह्वान किया।
युवाओं का संकल्प——/
छात्र परिषद अध्यक्ष आतीश सिंह ठाकुर ने कहा —
“आज का यह दिन केवल उत्सव नहीं, बल्कि संकल्प है… तिरंगा हमसे केवल प्रेम नहीं, बल्कि त्याग और सेवा की मांग करता है।”नगर मंत्री ईशा सोनी और प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अनुष्का पांडेय ने कहा —”जब तक हमारे हाथ में तिरंगा है, तब तक हमारे दिल में मातृभूमि के लिए प्रेम की लौ जलती रहेगी।”
परिश्रम की मिसाल——-
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में प्रेमांशु तंबोली, विकास, नवदीप, विनोद, करण, कुमकुम, बजरंग, आशीष, दौलत, रुद्र, वैभव, योगेश, शिवांग, बिट्टू, अरविंद, अनन्या, वंदना, प्रिंसी, बुलबुल, वृक्ष, मोनिका, हर्षा, खुशी, अनिता, रागिनी सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं का अथक परिश्रम रहा।जब यात्रा समाप्त हुई, तब भी गलियों में तिरंगे की छांव और देशभक्ति की गूंज बाकी थी। मानो रतनपुर की मिट्टी कह रही हो —
“तिरंगे की आन में जीना है, तिरंगे की शान में मरना है।”







