
रतनपुर:—-
धार्मिक नगरी रतनपुर में इस बार कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व सिर्फ भक्ति और उल्लास का ही नहीं, बल्कि करुणा और सेवा की मिसाल भी बन गया। महामाया मंदिर के पीछे, श्रद्धांजलि भवन के समीप एक भावुक पहल के रूप में “गो सेवा धाम” की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य घायल और बीमार गोवंश का प्राथमिक उपचार कर उन्हें नया जीवन देना है।
इस पावन धाम का उद्घाटन रतनपुर नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप के करकमलों से संपन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हमें केवल श्रीकृष्ण की लीलाओं की याद दिलाने वाला नहीं, बल्कि उनकी गऊ-प्रेम की भावना को आत्मसात करने का सन्देश भी देता है। गो सेवा ही सच्ची सेवा है।”
सेवा भावना से प्रेरित यह धाम, एक आश्रय है उन मूक प्राणियों के लिए, जो सड़कों पर घायल हो जाते हैं, बीमारियों से जूझते हैं और जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं होता। गो सेवा धाम में इन गोवंशों को चिकित्सा सुविधा, देखभाल और सुरक्षा मिलेगी।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। वातावरण में भजन की मधुर धुनें गूंज रही थीं, और हर चेहरा गो सेवा के इस कार्य से अभिभूत था। कई लोगों की आंखें नम थीं — यह केवल एक गौशाला नहीं, करुणा, दया और धर्म की जीवंत प्रतिमा बन कर उभरी है।
स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों ने संकल्प लिया कि वे नियमित रूप से घायल गायों की सूचना इस सेवा धाम को देंगे और उनकी सेवा में सहभागी बनेंगे।”यथा शक्ति सेवा, यही गो सेवा धाम का मंत्र है”, यह कहते हुए आयोजकों ने लोगों से अपील की कि गोवंश की रक्षा को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी समझें।वही इस शुभारंभ अवसर पर पार्षद प्रतिनिधि कुलदीप दुबे ,सुनील पाठक ,शीत प्रजापति,उपेश ठाकुर,हर्ष पटेल ,मोनु तिवारी सहित बड़ी संख्या वार्ड विकास समिति के सदस्य उपस्थित थे ।
कृष्ण जन्म के इस पुनीत दिन पर शुरू हुआ यह सेवायज्ञ, निश्चित ही रतनपुर की सामाजिक चेतना में नया अध्याय जोड़ेगा — एक ऐसा अध्याय, जहाँ धर्म सिर्फ मंदिरों की दीवारों तक नहीं, सड़कों पर तड़पते प्राणियों तक पहुँचेगा।








