पोड़ी उपरोड़ा से गेंदपाल मरकाम की रिपोर्ट
जटगा / पोड़ी उपरोड़ा: —-ग्राम पंचायत जटगा में शव विच्छेदन गृह (पोस्टमार्टम हाउस) की गंभीर स्थिति ने क्षेत्रवासियों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। पहले जहाँ स्थानीय स्तर पर शव विच्छेदन की सुविधा उपलब्ध थी, वहीं अब इस सुविधा के जर्जर और अनुपयोगी हो जाने से मृतकों के परिजनों को 40-50 किलोमीटर दूर पोड़ी उपरोड़ा तक शव ले जाना पड़ रहा है।
परिजनों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक हो जाती है। एक ओर अपनों के निधन का ग़म, दूसरी ओर लंबी दूरी तय कर शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाना — यह उनके दुख पर नमक छिड़कने जैसा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले परिवारों को परिवहन, समय और खर्च की भारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता: इस महत्वपूर्ण समस्या की ओर न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधियों का ध्यान जा रहा है। जबकि यह समस्या कोई नई नहीं है — शव विच्छेदन गृह लंबे समय से जर्जर अवस्था में पड़ा है। इसके पुनर्निर्माण या नए शव विच्छेदन गृह की स्वीकृति की माँग कई बार उठाई जा चुकी है, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।
50 गांवों की जनता प्रभावित: जटगा क्षेत्र से जुड़े लगभग 50 गाँवों के लोगों को इस समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है। यदि जटगा में पुनः शव विच्छेदन गृह का निर्माण हो जाए तो न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि परिजनों को मानसिक राहत भी मिलेगी।
जनता की माँग: क्षेत्रवासी शासन-प्रशासन से अपील कर रहे हैं कि इस दिशा में शीघ्र कार्रवाई की जाए। शव विच्छेदन गृह जैसी बुनियादी सुविधा का न होना एक तरह से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता को दर्शाता है।
अब देखना यह है कि शासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या को कितनी प्राथमिकता देते हैं और क्षेत्रवासियों को इस असुविधा से कब राहत मिलती है।










