
नहीं खरीदा जा रहा है किसानों से 21 क्विंटल धान
गरियाबंद:- धान खरीदी में रकबा कटौती को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए ब्लॉक कांग्रेस मीडिया प्रभारी टिकेश साहू ने कहा है छत्तीसगढ़ के किसान डिजिटल कार्प सर्वे और गिरदावरी के बोगस आंकड़े के आधार पर किए जा रहे रकबा कटौती से व्यथित है 21 क्विंटल प्रति एकड़ के बजाय मात्र 15 से 17 कुंटल प्रति एकड़ धान ही बेच पा रहे हैं सरकार की दुर्भावना से प्रदेश के किसानों के हाथों शोषण का शिकार होने मजबूर है।
ब्लॉक कांग्रेस मीडिया प्रभारी टिकेश साहू ने कहा कि सरकार के मौखिक आदेश से अलग-अलग क्षेत्र में अलग-अलग त्रुटि पूर्ण व्यवस्था की गई है कई जगह डिजिटल सर्वे किया गया हैं कई जगह खटिया गिरदावरी के आधार पर बिना मौका मुआवजा के फर्जी अनावरी रिपोर्ट बनाकर प्रति एकड़ धान खरीदी की लिमिट तय की गई है इस तरह के सरकार के दुर्भावना और खिचड़ी व्यवस्था से पूरा सिस्टम बिगड़ गया है गिरदावरी करना राजस्व विभाग का काम है लेकिन जब किसान अपनी शिकायत लेकर राजस्व विभाग पहुंच रहे हैं तो उन्हें समाधान के लिए खाद्य विभाग भेजा जा रहा है खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किसानों को कृषि और सहकारिता विभाग के पास भेज रहे हैं इस तरह से त्रुटि सुधरवाने के लिए चार-चार विभाग से जूझ रहे किसान हताश हो चुके हैं।
ब्लॉक कांग्रेस मीडिया प्रभारी टिकेश साहू ने कहा कि एकीकृत किसान पोर्टल और एग्री स्टेट पोर्टल का मिलान करने पर कई किसान गायब मिल रहे हैं धान के फसल से 5 हेक्टेयर रकबा का पंजीयन कम हुआ है इसमें से भी डिजिटल कॉर्प सर्वे में खेत के फसल को निरंक बताया जाता है अर्थात जिन किसानों ने अपने खेत में धान का फसल बोए गए है उनके भी फसल के कॉलम में निरंक दर्ज कर दिया गया है जिससे किसान धान बेचने से वंचित हो रहे हैं किसानों के खेतों के रकबा में कटौती किसानों की आम समस्या बन गया है।
ब्लॉक कांग्रेस मीडिया प्रभारी टिकेश साहू ने कहा कि किसानों का पूरा धन तैयार है लेकिन रिकार्ड में जमीन कम दिखाने से किसान अपना पूरा धान बेच नहीं पा रहे हैं सरकार और प्रशासन की गलती से सीधा नुकसान किसानों को हो रहा है तहसील ऑफिस राजस्व कार्यालय जिला कलेक्टर से लेकर मंत्री विधायकों तक किसान लगातार शिकायत कर रहे हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं है इस सरकार में समाधान के लिए कोई समय सीमा निश्चित नहीं की गई है त्रुटि पूर्ण गिरदावरी मोहल्ला पर वही नहीं बल्कि किसानों के अधिकार से खिलवाड़ है गिरदावरी जैसे महत्वपूर्ण कार्य में पारदर्शिता और जवाब देही होनी चाहिए लेकिन इस सरकार में कहीं दिख नहीं रहा है प्रशासन के रवैया से स्पष्ट है कि यह सरकार किसानों से पूरा धान नहीं खरीदना चाहती है।










