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पत्रकार से बदसलूकी के मामले में आबकारी आरक्षक पितांबर चौधरी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं, पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल

गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट
गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट

गरियाबंद:—-गरियाबंद जिले के फिंगेश्वर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कसेरीडीह में पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी के मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद आबकारी आरक्षक पितांबर चौधरी पर न तो विभागीय जांच शुरू हुई है और न ही कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम कसेरीडीह में आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी। इसी दौरान सूचना मिलने पर एक स्थानीय पत्रकार मौके पर पहुंचा और अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाते हुए फोटो-वीडियो कवरेज करने लगा। इसी दौरान नशे की हालत में मौजूद आबकारी आरक्षक पितांबर चौधरी ने पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार किया, जबरन मोबाइल फोन छीन लिया और धमकी भी दी।

पत्रकारों में आक्रोश, लोकतंत्र पर हमला
इस घटना को पत्रकारों ने केवल एक व्यक्ति के साथ हुई बदसलूकी नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता और लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है।

स्थानीय पत्रकार संगठनों और मीडिया कर्मियों में घटना को लेकर भारी रोष है। पत्रकारों का कहना है कि यदि एक वर्दीधारी अधिकारी नशे की हालत में मीडिया कर्मी के साथ ऐसा व्यवहार करता है और उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो यह पुलिस प्रशासनिक संरक्षण को दर्शाता है।

विभागीय संरक्षण का आरोप
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मामला सार्वजनिक होने और सोशल मीडिया व समाचार माध्यमों में उठने के बावजूद आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि आरोपी आरक्षक को विभागीय संरक्षण दिया जा रहा है।

नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक व एसडीओपी को तुरंत घटना स्थल पर ही फोन से सुचन दिया गया था बावजूद आबकारी आरक्षक पितांबर चौधरी पर पुलिस की कोई करवाई नहीं। अब ऐसे में क्या समझे

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

पत्रकार संगठनों और जागरूक नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि—

आरोपी आरक्षक पितांबर चौधरी को तत्काल निलंबित किया जाए

पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में

अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी साधे रहते हैं, या फिर स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा करते हुए दोषी के खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं।

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