
ग्राम पंचायत के अनुमोदन के बिना सरकार ने एनआरडीए को जमीन आबंटन कैसे किया- परमीत दुग्गा जिलाध्यक्ष आम आदमी पार्टी नारायणपुर
नारायणपुर :—- रायपुर जिले के धरसींवा विधानसभा अंतर्गत नकटी–सम्मानपुर में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने बताया कि जब 29 जून 2026 को जब आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधि मंडल नकटी गांव ग्रामीणों से मिलने पहुंचा, तो वहां गरीबों के घरों का ढहाया गया मलबा देख कर हतप्रभ रह गये। आप नेता नरेन्द्र नाग ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास की सबसे अमानवीय और मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं में से एक बताते हुए कहा कि बुलडोजर ने केवल गरीबों के मकान ही नहीं, बल्कि उनके सपनों, सम्मान और जीवन की उम्मीदों को भी मलबे में बदल दिया। कार्यवाही में लगभग 35 एकड़ ज़मीन पर बने 85 घरों को ध्वस्त किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि जिन लोगों के पास नोटिस नहीं आया ऐसे भी कुछ लोगों का घर उजाड़ दिया गया है?
29 जून तड़के लगभग 4 बजे भारी पुलिस बल की मौजूदगी में गरीब एवं मजदूर परिवारों के मकानों को ध्वस्त कर दिया गया, जिससे महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए। उनका कहना है कि किसी गरीब का घर केवल ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं होता, बल्कि उसकी वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदें और बच्चों के भविष्य का आधार होता है।
नकटी गाँव का सच उन लोगों के लिए जिन्हें ये या तो दिख नहीं रहा है या फिर वे जन बूझकर उसे देखना ही नहीं चाहते।सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले के बाद खुद छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार ने सभी कमिश्नर और कलेक्टर्स को उस फैसले का संदर्भ देते हुए ये आदेश जारी किया गया था।
अब सवाल ये उठता है कि जब पहले ऐसी सार्वजनिक उपयोग हेतु सुरक्षित जमीन को किसी अन्य प्रयोजन के आबंटन के लिए प्रस्तावित नहीं किया जाएगा,तो फिर अब ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी है। क्या भाजपा सरकार अपनी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के ही आदेश को भी नहीं मानती है?क्या सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद जारी परिपत्र का कोई महत्व नहीं है?और आखिर उस जमीन में ऐसा क्या है जो वहीं विधायक निवास बनाना जरूरी है?जब मंत्रियों के,मुख्य मंत्री का निवास नई राजधानी में बन सकता है तो फिर विधायक निवास वाहन क्यों नहीं बनाया जा रहा है?फिर बरसात में किसी का आशियाना उजाड़ देना,इंसानियत के नाते भी कहाँ जायज ठहराया जा सकता है?
बहरहाल एक बस्ती के उजड़ जाने पर कुछ लोगों की खामोशी,और राज्य सरकार का यही परिपत्र,सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ और मनमानी,सबकी ईमानदारी से जांच होना चाहिए तो शायद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा,और नकटी पर खामोश का राज भी सामने आ जाएगा। जब राजधानी में पहले से ही धरमपुरा, शैलेंद्र नगर और छेरीखेड़ी में पहले से ही विधायक कॉलोनी है तो अब चौथी विधायक कॉलोनी की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?
*उचित पुनर्वास हो :*
सरकार यदि इस भूमि का उपयोग किसी परियोजना के लिए करना चाहती थी तो सबसे पहले प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास, वैकल्पिक भूमि और उचित मुआवजे की व्यवस्था करनी चाहिए थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन परिवारों को वर्षों तक बिजली, पानी और अन्य सरकारी सुविधाएं मिलीं तथा कई परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला, उन्हीं परिवारों को अचानक बेघर कर देना किस प्रकार का सुशासन है?
*नकटी गांव के आजू बाजू नेताओं की ज़मीन :*
दरअसल सारा खेल जिस जगह पर गरीबों के मकान को उजाड़ा गया है उसके आजू-बाजू में 25 एकड़ ज़मीन मंत्री ओ पी चौधरी और 35 एकड़ जमीन गौरीशंकर अग्रवाल के परिवार की है निश्चित ही उनके लाभ के लिए ही यह सब किया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष परमीत दुग्गा ने कहा कि प्रत्येक प्रभावित परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़ी है और जब तक सभी विस्थापित परिवारों को न्याय, सम्मान, पुनर्वास और उनका अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक पार्टी का लोकतांत्रिक संघर्ष सड़क से सदन तक पूरी ताकत के साथ जारी रहेगा।







