
दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में जय स्तंभ चौक पर प्रदर्शन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग
“जब किताबों पर लाठियां बरसती हैं, तब लोकतंत्र का हर पन्ना दर्द से भर जाता है…”
इसी पीड़ा और आक्रोश के साथ गुरुवार को कोटा के जय स्तंभ नाका चौक पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने एक दिवसीय ब्लॉक स्तरीय विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली में अपने अधिकारों की आवाज बुलंद कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज के विरोध में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता, छात्र और आमजन एकत्र हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और छात्रों के समर्थन में आवाज बुलंद की गई।

प्रदर्शन में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव एवं जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री विशेष रूप से उपस्थित रहे। नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि छात्रों की आवाज को लाठियों और मुकदमों से दबाया जाएगा तो यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार होगा।
वक्ताओं ने कहा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं बल्कि देश के लाखों विद्यार्थियों के भविष्य, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। यदि शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं पर सवाल उठाने वाले छात्रों को ही प्रताड़ित किया जाएगा तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए चिंताजनक संकेत है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने तीन प्रमुख मांगें उठाईं—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग, परीक्षा में हुई अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलताओं पर संसद में चर्चा तथा नई दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और छात्राओं पर दर्ज सभी एफआईआर तत्काल वापस लेने की मांग।
सभा के अंत में प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक छात्रों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष कोटा अरुण त्रिवेदी ने कहा कि
कलम पर वार नहीं सहेंगे, छात्रों का अपमान नहीं सहेंगे।”
“जहां किताबें रोती हैं, वहां लोकतंत्र कमजोर होता है।”
“लाठी नहीं, शिक्षा दो; दमन नहीं, अधिकार दो।”
“छात्रों की आवाज दबेगी नहीं, हर गली से उठेगी।”
“जो युवा की आवाज दबाएगा, इतिहास उसे माफ नहीं करेगा।”
“लोकतंत्र की पहचान—छात्रों का सम्मान।”
“डर से नहीं, अधिकार से चलेगा देश।”
“कलम की ताकत पर लाठी का पहरा मंजूर नहीं।”
“हर छात्र की यही पुकार—शिक्षा, सम्मान और अधिकार।”
“छात्रों पर अत्याचार बंद करो, लोकतंत्र का सम्मान करो।”
“परीक्षा में पारदर्शिता दो, युवाओं को न्याय दो।”
“जब युवा जागता है, तभी देश आगे बढ़ता है।”
“आवाज दबेगी नहीं, संघर्ष रुकेगा नहीं।”
“युवा शक्ति का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
“छात्रों का सम्मान, देश का सम्मान।
“लाठी से आवाजें दब सकती हैं, लेकिन सपनों को कैद नहीं किया जा सकता।
छात्रों के सम्मान की लड़ाई लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा है।”








