
ग्रामीणों की शिकायतों और मीडिया की खबरों के बाद बड़ी कार्यवाही, कई क्लीनिक बंद मिले तो कई कथित डॉक्टर मौके से फरार
कोटा/बिलासपुर:—“इलाज” के नाम पर ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आखिरकार स्वास्थ्य विभाग का डंडा चलना शुरू हो गया है। कोटा विकासखंड में लगातार मिल रही शिकायतों, मीडिया में प्रकाशित खबरों और ग्रामीणों की मांग के बाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक अभियान चलाते हुए झोलाछाप डॉक्टरों एवं अवैध क्लीनिकों पर ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई की। कार्रवाई की भनक लगते ही कई कथित झोलाछाप डॉक्टर क्लीनिक बंद कर फरार हो गए, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. निखिलेश गुप्ता के नेतृत्व में जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्राम आमागोहन, सोनसाय नवागांव, कुदर सहित विभिन्न गांवों में पहुंचकर संदिग्ध रूप से चिकित्सा व्यवसाय करने वालों की जांच की। अभियान के दौरान ग्राम आमागोहन स्थित नंदिनी मेडिकल में प्रैक्टिस कर रहे राम कुमार श्रीवास, सोनसाय नवागांव में रामकुमार प्रजापति, आमागोहन में वैद्य तिरुपति राव, विश्वास, कुदर में राजू गुप्ता एवं मनोज कुमार के यहां जांच कर नियमानुसार कार्रवाई प्रारंभ की गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीम जब कई स्थानों पर पहुंची तो कई क्लीनिकों के शटर बंद मिले, जबकि कुछ कथित झोलाछाप डॉक्टर मौके पर नहीं मिले। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई की सूचना मिलते ही कई लोग गांव छोड़कर चले गए और अपने क्लीनिकों पर ताले लगा दिए। विभागीय अधिकारियों ने बंद क्लीनिकों का भी निरीक्षण कर आवश्यक दस्तावेज तैयार किए।

बीएमओ डॉ. निखिलेश गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सभी स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फील्ड में सक्रिय कर संदिग्ध क्लीनिकों की जानकारी जुटाने तथा नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
अभियान के दौरान जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलते रहने चाहिए। उनका मानना है कि जब तक झोलाछाप डॉक्टरों पर स्थायी अंकुश नहीं लगेगा, तब तक मासूम और गरीब लोगों की जान जोखिम में बनी रहेगी।
खंड चिकित्सा अधिकारी निखिलेश गुप्ता ने कहा
“सस्ता इलाज नहीं, सुरक्षित इलाज चुनिए—झोलाछाप से सावधान रहिए, क्योंकि एक गलत इलाज जिंदगी भर का दर्द बन सकता है।”

मौत बांटने वालों पर स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा, गांव-गांव पहुंची टीम; झोलाछाप डॉक्टरों में मचा हड़कंप">







