
हरेली पर विधायक अटल श्रीवास्तव ने पारंपरिक कृषि औजारों की पूजा कर किसानों की खुशहाली की कामना
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोकपर्व हरेली के अवसर पर कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने पारंपरिक विधि-विधान के साथ कृषि कार्य में उपयोग होने वाले औजारों और उपकरणों की पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश और क्षेत्रवासियों को हरेली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए किसानों की खुशहाली, अच्छी बारिश, बेहतर फसल और क्षेत्र की समृद्धि की कामना की।
हरेली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, किसान और प्रकृति के बीच पीढ़ियों से चले आ रहे रिश्ते का उत्सव है। खेतों में मेहनत करने वाले किसान के लिए हल, कुदाल, फावड़ा और अन्य कृषि औजार उसकी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। हरेली के दिन इन्हीं औजारों की पूजा कर किसान अपनी मेहनत और अन्नदाता की भूमिका को सम्मान देता है।
‘औजार नहीं, हमारी मेहनत और विरासत की पहचान’
विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि खेती-किसानी में उपयोग होने वाले पारंपरिक औजार महज उपकरण नहीं हैं, बल्कि हमारी मेहनतकश किसान संस्कृति, ग्रामीण जीवन और गौरवशाली परंपरा की पहचान हैं। हरेली पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं सदियों से गांव, खेत और प्रकृति के साथ जुड़ी रही हैं। आधुनिकता के दौर में भी इन परंपराओं को सहेजना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
किसानों के चेहरे पर रहे खुशहाली की हरियाली
विधायक ने कहा कि किसान की खुशहाली में ही गांव और प्रदेश की समृद्धि छिपी है। उन्होंने किसानों के लिए अच्छी बारिश, भरपूर फसल और आर्थिक खुशहाली की कामना की। हरेली के अवसर पर उन्होंने कहा कि खेतों में लहलहाती फसल केवल किसान की मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जीवनदायिनी धरती और प्रकृति के आशीर्वाद का प्रतीक है।
उन्होंने प्रदेशवासियों से अपनी लोक संस्कृति, परंपराओं और प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान किया।
हरेली का संदेश—मिट्टी से जुड़ें, प्रकृति को बचाएं
हरेली पर्व के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति में यह संदेश भी मिलता है कि प्रकृति का सम्मान और किसान की मेहनत, दोनों हमारे जीवन की बुनियाद हैं। कृषि औजारों की पूजा इसी भावना का प्रतीक है कि जिस साधन से अन्न पैदा होता है, उसका भी सम्मान होना चाहिए।
“हल की पूजा, किसान का सम्मान—हरेली में गूंजे छत्तीसगढ़ की पहचान।”
“माटी से रिश्ता, किसान से प्यार—हरेली है छत्तीसगढ़ की संस्कृति का त्योहार।”








