
उपका में भोजली महापर्व का भव्य शुभारंभ — पांच बीजों से बच्चों ने समझा अंकुरण और प्रकाश संश्लेषण का विज्ञान
उपका, घरघोड़ा:— छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और प्रकृति प्रेम का प्रतीक भोजली महापर्व ग्राम उपका के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला एवं शासकीय प्राथमिक शाला में उत्साह और उल्लास के साथ शुरू हुआ। इस बार विद्यालय में भोजली पर्व को केवल पारंपरिक आयोजन तक सीमित न रखते हुए पर्यावरण और विज्ञान से जोड़कर बच्चों के लिए जीवंत पाठशाला बनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक भोजली गीत “भोजली भोजली ए दाई, मोला दे दे…” से हुई। गांव की महिलाओं ने सामूहिक रूप से भोजली गीत गाकर विद्यालय परिसर को लोक संस्कृति की खुशबू से सराबोर कर दिया।
🌱 पांच बीज, सात दिन का अवलोकन और विज्ञान की सीख
परंपरा के अनुसार बांस की छोटी टोकनी में मिट्टी और गोबर खाद डालकर गेहूं, धान, ज्वार, उड़द और मक्का के पांच प्रकार के बीज बोए गए। इसके बाद बच्चों को बीज के अंकुरण से पौधा बनने तक की वैज्ञानिक प्रक्रिया समझाई गई।
पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक सूर्यकांत बाजपेई ने बच्चों को बताया कि भोजली केवल एक लोकपर्व नहीं, बल्कि खेती-किसानी, पर्यावरण और विज्ञान का सुंदर संगम है। उन्होंने बच्चों को अंकुरण, पौधों की वृद्धि और प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि धूप और अंधेरे में रखी भोजली के रंग में अंतर क्यों दिखाई देता है।
बच्चों को भोजली के पौधों का अगले सात दिनों तक प्रतिदिन अवलोकन कर उनकी वृद्धि और बदलाव को कॉपी में दर्ज करने का कार्य भी दिया गया।

🌿 “लोक परंपरा से पर्यावरण संरक्षण तक”
विद्यालय परिसर में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। शिक्षकों ने भोजली के माध्यम से बच्चों को प्रकृति, मिट्टी, बीज और पौधों के महत्व से जोड़ते हुए बताया कि हमारी लोक परंपराओं में भी पर्यावरण संरक्षण का गहरा संदेश छिपा है।
प्रधान पाठक ने बताया कि रक्षाबंधन के दूसरे दिन भोजली का आदान-प्रदान मित्रता, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। भोजली को कानों में लगाकर अच्छी फसल, खुशहाली और समृद्धि की कामना करने की परंपरा भी छत्तीसगढ़ की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
“भोजली का पर्व, हरियाली का संदेश — परंपरा के साथ विज्ञान का प्रवेश।”
“बीज से पौधा, पौधे से जीवन — भोजली सिखाए प्रकृति का विज्ञान।”
“लोक संस्कृति का मान बढ़ाएं, हर भोजली में हरियाली लाएं।”
👥 ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक सूर्यकांत बाजपेई, मीरा जगत, प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक राम खिलावन बैग, कृष्णा जगत, कुसुम बुनकर, शाला विकास समिति अध्यक्ष जलेश्वरी बाई, ग्राम पंचायत उपका की सरपंच रामकुमारी उरेती, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तिलमती उरेती, पुन्नी बाई, श्याम बाई, ईश्वर सिंह, संजय मानिकपुरी, कन्हैया लाल मार्को, रामकुमार बैगा, प्रियांशु मार्को, अनसुईया, मोनिका मार्को, दिशा अग्रवाल सहित महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं, ग्रामीणजन एवं बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थित रहे।
खास बात: उपका स्कूल में भोजली को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि “जीवंत विज्ञान प्रयोग” के रूप में बच्चों से जोड़ना आयोजन का सबसे खास आकर्षण रहा।







