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वर्दी में दिखी भाई की ममता… भूखे बच्चों को खिलाया खाना, फिर पहुंचाया घर

“संभागीय जिला ब्यूरो रवि राज रजक की रिपोर्ट”
“संभागीय जिला ब्यूरो रवि राज रजक की रिपोर्ट”

 

बेलगहना:—रास्ता भूले तीन बच्चों के लिए फरिश्ता बने चौकी प्रभारी बीएस वनाफर, जनपद सदस्य प्रतिनिधि नेहा सचिन साहू ने भी निभाई अहम भूमिका
पुलिस और जनप्रतिनिधि ने मिलकर संभाला बच्चों को, खाना खिलाकर पूछी घर की जानकारी और परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाया
बेलगहना। कभी-कभी वर्दी का सबसे खूबसूरत चेहरा कानून के पालन में नहीं, बल्कि किसी डरे-सहमे इंसान को अपना समझकर सहारा देने में दिखाई देता है।

बेलगहना चौकी प्रभारी बीएस वनाफर ने तीन रास्ता भटके बच्चों के साथ ऐसा ही मानवीय व्यवहार कर पुलिस का संवेदनशील चेहरा सामने रखा। घूमने निकले तीन बच्चे रास्ता भटककर अपने घर से दूर हो गए थे। अनजान रास्तों पर भटकते और भूख से परेशान बच्चों को देखकर चौकी प्रभारी ने उन्हें अपने पास बुलाया, उनका हाल जाना और बड़े भाई की तरह पहले खाना खिलाया, फिर उन्हें घर पहुंचाने की जिम्मेदारी उठाई।

जहां बच्चों की आंखों में था डर, वहीं पुलिस ने दिया भरोसा

जानकारी के अनुसार कबीरधाम जिले के तेलियापानी थाना क्षेत्र के तीन बच्चे घूमने के लिए निकले थे। इसी दौरान वे रास्ता भटक गए और घर पहुंचने का रास्ता नहीं मिल पा रहा था। अलग-अलग जगहों पर भटकते हुए बच्चे परेशान और भूखे हो गए थे।
बच्चों की स्थिति देखकर चौकी प्रभारी बीएस वनाफर ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने बच्चों को अपने साथ बैठाकर बातचीत की और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे घबराएं नहीं। पुलिस उनके साथ है और उन्हें सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया जाएगा।
बच्चों की भूख देखकर चौकी प्रभारी ने सबसे पहले उन्हें खाना खिलाया। इसके बाद प्यार से बच्चों से उनके गांव, घर और थाना क्षेत्र के बारे में जानकारी ली गई।

पुलिस के साथ जनप्रतिनिधि ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

बच्चों को उनके घर तक पहुंचाने की इस पूरी प्रक्रिया में जनपद सदस्य नेहा सचिन साहू के प्रतिनिधि ने भी पुलिस के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस और जनप्रतिनिधि प्रतिनिधि ने बच्चों को खाना खिलाकर उनकी जानकारी जुटाई तथा संबंधित थाना और परिजनों से संपर्क स्थापित करने में सहयोग किया।
इसके बाद तेलियापानी थाना कबीरधाम से संपर्क कर बच्चों की जानकारी साझा की गई। आवश्यक समन्वय के बाद बच्चों के परिजनों से संपर्क हुआ और तीनों बच्चों को सुरक्षित उनके गृह ग्राम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई।

घर पहुंचे बच्चे तो परिजनों की आंखों में छलक आई राहत

जब तीनों बच्चे सकुशल अपने घर पहुंचे तो परिजनों ने राहत की सांस ली। जिस चिंता में परिवार बच्चों की तलाश को लेकर परेशान था, वह चिंता बच्चों के घर पहुंचते ही खुशी में बदल गई।
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस और जनप्रतिनिधि के मानवीय प्रयास की क्षेत्र में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि पुलिस जब कानून के साथ इंसानियत का हाथ थामती है, तब वर्दी लोगों के लिए डर नहीं, भरोसे का प्रतीक बन जाती है।

“रास्ता भटक गए थे बच्चे… मगर इंसानियत ने उन्हें घर तक पहुंचा दिया।”
“वर्दी ने कानून का फर्ज निभाया, दिल ने बड़े भाई का रिश्ता निभाया।”

पुलिस का मानवीय चेहरा

वर्दी का रुतबा नहीं, इंसानियत का रिश्ता निभाया।
चौकी प्रभारी बीएस वनाफर ने बच्चों को केवल पुलिस की जिम्मेदारी समझकर नहीं संभाला, बल्कि बड़े भाई की तरह उनका हाथ थामा, भूख मिटाई, हौसला बढ़ाया और घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई।

जनप्रतिनिधि की संवेदनशील पहल

पुलिस के साथ जनपद सदस्य प्रतिनिधि भी बने बच्चों का सहारा
जनपद सदस्य नेहा सचिन साहू के प्रतिनिधि ने पुलिस के साथ समन्वय कर बच्चों को खाना खिलाने, उनकी जानकारी जुटाने और उन्हें परिजनों तक सुरक्षित पहुंचाने में महत्वपूर्ण सहयोग किया।

“बच्चों को घर का रास्ता पुलिस ने बताया, लेकिन उस रास्ते पर उन्हें चलने का हौसला इंसानियत ने दिया।”

पुलिस और जनप्रतिनिधि की इस संवेदनशील पहल ने साबित किया—मुसीबत में साथ खड़ी वर्दी ही जनता के दिल में असली भरोसा पैदा करती है।

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