
खेदापाली-बांधापाली की पूरी भूमि अधिग्रहण की मांग, पुनर्वास-रोजगार से लेकर सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर उठे सवाल
29 सितंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध और बहिष्कार का ऐलान
छाल/रायगढ़:— SECL की छाल खुली खदान (OCM) के प्रस्तावित विस्तार से पहले प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के सामने लंबित समस्याओं और मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किए बिना खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने आगामी 29 सितंबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध और बहिष्कार का ऐलान किया है। उनका कहना है कि पहले प्रभावित परिवारों के अधिकारों और वर्षों से लंबित समस्याओं का समयबद्ध एवं स्थायी निराकरण किया जाए, इसके बाद ही विस्तार संबंधी प्रक्रिया पर आगे विचार हो।
खेदापाली-बांधापाली की पूरी भूमि अधिग्रहण की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांग खेदापाली और बांधापाली गांवों की संपूर्ण भूमि के अधिग्रहण को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों गांवों की केवल कुछ भूमि का अधिग्रहण किया गया है, जबकि पूरी भूमि के अधिग्रहण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार आंशिक अधिग्रहण की स्थिति में एक ही गांव के कुछ परिवार सीधे प्रभावित होते हैं, जबकि आसपास रहने वाले अन्य परिवार भी खनन गतिविधियों और उससे उत्पन्न परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने पूरी भूमि का समग्र अधिग्रहण कर मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़े मामलों का एक साथ समाधान करने की मांग की है।
13 साल बाद भी पुनर्वास का मुद्दा जस का तस
ज्ञापन में ग्रामीणों ने दावा किया है कि गांवों के अधिग्रहण के करीब 13 वर्ष बाद भी कुछ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़े मामले लंबित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक कुछ परिवारों के मकान तोड़े जाने के बावजूद पुनर्वास आबंटन और पुनर्वास स्थल से जुड़े मामलों का समाधान नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों ने वर्तमान में बालिग हो चुके परिवार के सदस्यों को पुनर्वास का लाभ देने, कम भूमि अधिग्रहित किए गए किसानों को रोजगार देने तथा भूमिहीन एवं अन्य प्रभावित परिवारों के रोजगार से जुड़े मामलों के निराकरण की मांग भी उठाई है।
सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी सवाल
प्रभावित ग्रामीणों ने क्षेत्र में पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्कूल बस, स्वास्थ्य और प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिन गांवों की भूमि और जीवन-व्यवस्था खनन परियोजना से प्रभावित हो रही है, वहां मूलभूत सुविधाओं का स्थायी विकास प्राथमिकता होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने SECL द्वारा संचालित DAV विद्यालय में प्रभावित परिवारों के बच्चों के प्रवेश से जुड़ी परेशानियों का भी उल्लेख किया है। उनकी मांग है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के बच्चों की शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
CSR पर ग्रामीणों का सवाल—प्रभावित गांवों तक कितना पहुंचा लाभ?
ग्रामीणों ने SECL की CSR व्यवस्था और प्रभावित गांवों में CSR राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्र में CSR के माध्यम से अपेक्षित स्तर पर विकास कार्य नहीं हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि CSR केवल औपचारिक गतिविधियों तक सीमित न रहे, बल्कि प्रभावित गांवों में पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्कूल परिवहन और अन्य सामुदायिक जरूरतों के समाधान में उसका प्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देना चाहिए।
ग्रामीणों ने CSR के तहत प्रभावित गांवों के लिए स्वीकृत एवं खर्च की गई राशि, उसके मदवार उपयोग, लाभान्वित गांवों और प्रस्तावित कार्यों का पारदर्शी विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी नाराजगी
ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रभावित जनता के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं, एंबुलेंस और SECL से संबंधित स्वास्थ्य लाभों की उपलब्धता को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की ठोस एवं प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।
रोजगार प्रक्रिया में देरी का आरोप
रोजगार से जुड़े मामलों में दस्तावेजी प्रक्रिया में कथित देरी को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि दस्तावेजों की प्रक्रिया में विलंब होने से प्रभावित लोगों को रोजगार प्राप्त करने में अनावश्यक समय लग रहा है।
ग्रामीणों ने रोजगार से जुड़े मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी निराकरण किए जाने की मांग की है।
समाधान शिविर के बाद अब 29 सितंबर की जनसुनवाई के बहिष्कार का ऐलान
ग्रामीणों ने कहा कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का अपेक्षित समाधान नहीं होने के कारण उन्होंने 19 सितंबर को आयोजित समाधान शिविर का बहिष्कार किया। अब उन्होंने 29 सितंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध और बहिष्कार का निर्णय लिया है।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि पहले भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, रोजगार, CSR, शिक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों का ठोस समाधान किया जाए। इसके बाद ही खदान विस्तार से संबंधित आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाना चाहिए।
ग्रामीण बोले—विकास के विरोधी नहीं, अधिकारों की अनदेखी मंजूर नहीं
रामसिंग राठिया, ग्राम पंचायत खेदापाली ने कहा कि प्रभावित परिवारों की भूमि, पुनर्वास और रोजगार की लंबित समस्याओं का समाधान किए बिना खदान विस्तार उचित नहीं है। इन्हीं कारणों से 29 सितंबर की जनसुनवाई का विरोध किया जा रहा है।
लालू ठाकुर, अधि. ग्राम पंचायत छाल ने कहा कि प्रभावित गांवों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की समस्याएं बनी हुई हैं। पहले इनका समाधान होना चाहिए, इसलिए प्रस्तावित जनसुनवाई का विरोध किया जाएगा।
शिवनाथ अकेला, ग्राम पंचायत खेदापाली ने कहा कि ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रभावित लोगों के अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। लंबित मामलों का समाधान होने तक 29 सितंबर की जनसुनवाई का विरोध और बहिष्कार जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि उनकी आपत्तियों और मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए समयबद्ध, पारदर्शी और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए।

छाल OCM विस्तार से पहले ग्रामीणों का बड़ा सवाल—पहले अधिकारों का निराकरण, फिर खदान विस्तार">







