
बिलासपुर:;— मस्तूरी ब्लॉक में बिजली व्यवस्था को लेकर बिजली विभाग के मेंटेनेंस और निर्बाध आपूर्ति के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हल्की आंधी और खराब मौसम के बीच 33 केवी विद्युत लाइन का बार-बार टूटना और ब्रेकडाउन होना विभाग की तैयारियों की पोल खोल रहा है। इसका सीधा असर पूरे मस्तूरी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है।
मस्तूरी बिजली सब स्टेशन के अंतर्गत आने वाले कोनी फीडर में बिजली आपूर्ति का हाल बेहद चिंताजनक है।
जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 2 बजे बिजली बंद हुई। रात 10 बजे लगभग 20 मिनट के लिए आपूर्ति बहाल हुई, लेकिन इसके बाद फिर बिजली गुल हो गई। पूरी रात अंधेरे में गुजारने के बाद सुबह करीब 5:30 बजे बिजली आई। इस तरह उपभोक्ताओं को 15 घंटे से अधिक समय तक बिजली संकट का सामना करना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 33 केवी की मुख्य सप्लाई लाइन ही बार-बार ब्रेकडाउन का शिकार हो रही है, तो 11 केवी फीडरों से निर्बाध बिजली आपूर्ति की उम्मीद कैसे की जा सकती है? आखिर मुख्य लाइन में बार-बार खराबी क्यों आ रही है और इसका स्थायी समाधान अब तक क्यों नहीं हो पाया?
स्थिति यह है कि मस्तूरी ब्लॉक के ग्रामीण इलाकों में आए दिन बिजली बंद होने से आम उपभोक्ता, किसान और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। हर बार तकनीकी खराबी और लाइन में फॉल्ट का हवाला दिया जाता है,
लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नजर नहीं आता।
अब सवाल बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से है कि मेंटेनेंस के नाम पर आखिर क्या काम किया जा रहा है? क्या विभाग केवल ब्रेकडाउन के बाद मरम्मत तक सीमित है या विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी कोई ठोस योजना है?
ग्रामीण उपभोक्ताओं की मांग है कि 33 केवी मुख्य लाइन की तकनीकी जांच कराई जाए, बार-बार होने वाले ब्रेकडाउन की वजह पता लगाई जाए और स्थायी सुधार किया जाए, ताकि मस्तूरी ब्लॉक के लोगों को बार-बार पूरी रात अंधेरे में न गुजारनी पड़े।







