
सुरक्षित बचपन अभियान के तहत निकली प्रभात फेरी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी ने हरी झंडी दिखाकर किया शुभारंभ
कोंडागांव :— बच्चों को बाल विवाह और बाल शोषण जैसी सामाजिक बुराइयों से मुक्त कर उन्हें सुरक्षित, सम्मानजनक एवं खुशहाल बचपन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के दिशा-निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोंडागांव के तत्वावधान में संचालित ‘सुरक्षित बचपन अभियान’ के अंतर्गत आज ‘ना बाल विवाह, ना बाल शोषण’ थीम पर स्कूली बच्चों द्वारा जागरूकता प्रभात फेरी निकाली गई।
प्रभात फेरी परिवार न्यायालय परिसर से प्रारंभ होकर बस स्टैंड होते हुए अंबेडकर चौक तक पहुंची। रैली का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोंडागांव के अध्यक्ष खिलावन राम रिगरी ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान स्कूली बच्चों ने हाथों में जागरूकता संदेश लेकर तथा प्रेरक नारों का उद्घोष करते हुए आम नागरिकों को बाल विवाह एवं बाल शोषण के विरुद्ध जागरूक किया।
अभियान की मुख्य थीम ‘जागरूकता, सुरक्षा और संरक्षण – हर बच्चे का अधिकार’ (Awareness, Safety and Protection – Every Child’s Right) है। इस थीम के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में जीने, शिक्षा प्राप्त करने, अपने विचार व्यक्त करने, सम्मान के साथ आगे बढ़ने तथा शोषण और भेदभाव से मुक्त रहने का अधिकार है। बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है।
‘हर बच्चे का बचपन, हम सबकी जिम्मेदारी’ है। इसका आशय है कि बच्चों के बचपन को सुरक्षित रखना, उनके अधिकारों का सम्मान करना और उनके साथ होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल विवाह बच्चों से उनका बचपन, शिक्षा और अपने भविष्य के निर्णय लेने का अवसर छीन सकता है। वहीं बाल शोषण उनके शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसलिए बाल विवाह को रोकना, बाल शोषण के प्रति सजग रहना, बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से सुनना तथा किसी भी संदिग्ध स्थिति की जानकारी संबंधित विभागों तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
रैली के माध्यम से आम नागरिकों को यह भी समझाया गया कि बच्चों को डर या चुप्पी के वातावरण में नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और सहयोग के माहौल में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। जब परिवार, विद्यालय, समाज और प्रशासन मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा करेंगे, तभी सुरक्षित बचपन का सपना साकार होगा।
इस अवसर पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश विक्रम प्रताप चंद्रा, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) सुश्री प्रतिभा मरकाम, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती रेशमा बैरागी पटेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री गायत्री साय, प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारी सुश्री सीमा टांडे, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष दीपक ठाकुर, पैनल अधिवक्ता सुरेंद्र भट्ट, तिलक पांडे, नरेश नाईक गौरव जैन, पुलिस विभाग से थाना प्रभारी सौरभ उपाध्याय, अजाक थाना प्रभारी रमेश शोरी एवं शिक्षा विभाग से वेणुगोपाल, महिला एवं बाल विकास विभाग के बाल संरक्षण अधिकारी नरेंद्र सोनी, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष त्रिलोक सार्वा, परिवीक्षा अधिकारी सौरभ तिवारी सहित अन्य रिसोर्स पर्सन एवं अधिकार मित्रों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोंडागांव की यह पहल बाल विवाह एवं बाल शोषण के विरुद्ध सामाजिक चेतना विकसित करने के साथ-साथ बच्चों के अधिकारों के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का भाव मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। अभियान का उद्देश्य ऐसा समाज निर्मित करना है, जहां कोई बच्चा बाल विवाह के लिए विवश न हो, कोई बच्चा शोषण का शिकार न बने और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक एवं भयमुक्त वातावरण में अपना भविष्य संवारने का अवसर मिले।







