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जेसीबी और हाइवा से करीब 10 फीट तक की गई खुदाई, जतमई मार्ग पर डाली जा रही मुरम, कार्रवाई की भनक लगते ही मशीनें हटा दिया गया

गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट
गरियाबंद से देव प्रसाद बघेल की रिपोर्ट

*गरियाबंद*:- छुरा विकासखंड से लगे ग्राम गयाडबरी में बड़े पैमाने पर अवैध मुरम खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ठेकेदार द्वारा जेसीबी और हाइवा की सहायता से करीब 10 फीट तक गहरी खुदाई कर बड़ी मात्रा में मुरम निकाली जा रही है। निकाली गई मुरम को गयाडबरी से जतमई मार्ग पर सड़क निर्माण कार्य के लिए सड़क किनारे डाला जा रहा है।
इस पूरे मामले ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, गयाडबरी क्षेत्र में कई दिनों से लगातार जेसीबी और हाइवा के माध्यम से मुरम का उत्खनन किया जा रहा है। खनन स्थल पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे भविष्य में दुर्घटना की आशंका भी बढ़ गई है। बिना वैध अनुमति के इस तरह बड़े पैमाने पर खनन कर शासन को राजस्व की क्षति पहुंचाई जा रही है, वहीं पर्यावरण और भूमि की प्राकृतिक संरचना को भी नुकसान हो रहा है।
मामले की सूचना खनिज विभाग को दिए जाने के बाद खनिज अधिकारी अर्चना ठाकुर ने टीम भेजकर कार्रवाई कराने की बात कही थी। लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद न तो विभाग का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही जांच या कार्रवाई होती दिखाई दी। इससे विभाग की कार्यशैली को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि शिकायत मिलने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे।

कार्रवाई की सूचना मिलते ही ठेकेदार ने खनन कार्य में लगी जेसीबी और हाइवा को संकरा क्षेत्र में ले जाकर छिपा दिया, ताकि विभागीय कार्रवाई से बचा जा सके। इसके बाद भी मौके पर किसी प्रकार की जांच या वाहन जब्ती की कार्रवाई नहीं होने से विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि यदि समय रहते खनिज विभाग मौके पर पहुंचता तो अवैध खनन में प्रयुक्त मशीनों और वाहनों को जब्त किया जा सकता था। लेकिन विभाग की देरी के कारण ऐसा नहीं हो सका। इससे यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या अवैध खनन करने वालों को विभागीय लापरवाही का लाभ मिल रहा है।
गौरतलब है कि जिले में अवैध मुरम, रेत और पत्थर के खनन को रोकने के लिए समय-समय पर अभियान चलाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन गयाडबरी का यह मामला उन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं बल्कि विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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