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24 घंटे में सुलझे अंधे कत्ल में उम्रकैद सभी गवाह मुकर गए, फिर भी वैज्ञानिक साक्ष्यों और मेमोरेंडम-जप्ती के आधार पर कोर्ट ने सुनाई आजीवन कारावास की सजा

“संभागीय जिला ब्यूरो रवि राज रजक की रिपोर्ट”
“संभागीय जिला ब्यूरो रवि राज रजक की रिपोर्ट”

“सटीक विवेचना, वैज्ञानिक साक्ष्य और नवीन कानून का प्रभाव—हत्या के आरोपी को मिला उम्रकैद, पीड़ित परिवार को मिला न्याय।”

 

जब गवाह पलट गए, तब बोले वैज्ञानिक साक्ष्य—फोटो-वीडियोग्राफी, मेमोरेंडम और बरामदगी ने दिलाई उम्रकैद, पुलिस की सटीक विवेचना बनी न्याय की मजबूत नींव

बेलगहना (बिलासपुर):— चौकी बेलगहना पुलिस द्वारा वर्ष 2025 में महज 24 घंटे के भीतर सुलझाए गए अंधे कत्ल के चर्चित मामले में न्यायालय ने आरोपी यशराज भानु उर्फ छोटा (20 वर्ष), निवासी पहाड़बछाली को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सुनवाई के दौरान अधिकांश गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद पुलिस की वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित विवेचना, आरोपी के मेमोरेंडम और बरामदगी को न्यायालय ने विश्वसनीय मानते हुए दोष सिद्ध किया।


यह विवेचना तत्कालीन चौकी प्रभारी उप निरीक्षक राज सिंह द्वारा की गई थी, जिसमें नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों का प्रभावी पालन करते हुए घटनास्थल की फोटो-वीडियोग्राफी, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और प्रत्येक कार्रवाई का विधिवत दस्तावेजीकरण किया गया था।
ऐसे हुआ था अंधा कत्ल
पुलिस के अनुसार, 4 अगस्त 2025 को पहाड़बछाली निवासी कोटवार गंगा बाई गंधर्व ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसी दिन सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच छेदीलाल यादव की बृहस्पति बाई के घर में किसी अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी। सूचना मिलते ही चौकी बेलगहना में हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण किया गया तथा सभी भौतिक एवं वैज्ञानिक साक्ष्य सुरक्षित किए गए।
पूछताछ में टूटा आरोपी, टांगिया बरामद
जांच के दौरान पुलिस का संदेह यशराज भानु उर्फ छोटा पर गया। हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर उसने हत्या करना स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त टांगिया बरामद किया गया। बरामदगी की पूरी प्रक्रिया गवाहों की मौजूदगी में पूरी की गई तथा उसका विधिवत दस्तावेजीकरण किया गया। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को 5 अगस्त 2025 को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था।

गवाह मुकरे, फिर भी नहीं टूटी अभियोजन की कड़ी

मुकदमे की सुनवाई के दौरान कई गवाह शत्रुतापूर्ण (होस्टाइल) हो गए, लेकिन पुलिस द्वारा विवेचना के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य, मेमोरेंडम, बरामदगी और घटनास्थल की फोटो-वीडियोग्राफी ने अभियोजन पक्ष को मजबूत आधार प्रदान किया। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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वेबसाइट में प्रकाशित खबरों से संपादक का सहमत होना आवश्यक नहीं है समाचार की विषयवस्तु संवाददाता के विवेक पर निर्भर यह एक हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जिसमें छत्तीसगढ़ सहित देश और दुनिया की खबरें प्रकाशित की जाती हैं। वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी समाचार से संबंधित कानूनी विवाद की स्थिति में केवल बिलासपुर न्यायालय की ही मान्यता होगी।

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