
बिलासपुर:— समय पर लिया गया एक सही निर्णय और निस्वार्थ सेवा का भाव किसी की जिंदगी बचा सकता है। इसका जीवंत उदाहरण 26 जुलाई 2026, रविवार की रात देखने को मिला, जब समाजसेवी अलीम अंसारी एवं शहर के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुपेश अग्रवाल की तत्परता और सूझबूझ से 12 वर्षीय मोहम्मद फैजान को नया जीवन मिला।
जानकारी के अनुसार, रात लगभग 11:30 बजे समाजसेवी अलीम अंसारी को मोहम्मद सुल्तान एवं कमरुद्दीन हुसैन का फोन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि नांदघाट के मोहम्मद सगीर का पुत्र मोहम्मद फैजान को शाम लगभग 6 बजे तेज बुखार की गंभीर स्थिति में शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। सूचना मिलते ही अलीम अंसारी तत्काल अस्पताल पहुंचे। बच्चे की नाजुक हालत को देखते हुए उन्होंने बिना विलंब किए बेहतर उपचार की व्यवस्था कराई तथा स्वयं अपनी कार से बच्चे को शहर के वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रुपेश अग्रवाल के अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉ. रुपेश अग्रवाल ने बच्चे की गंभीर स्थिति का परीक्षण किया। उस समय बच्चे के शरीर में लगभग कोई हरकत नहीं थी और केवल धड़कन चल रही थी। उन्होंने तत्काल बच्चे को आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया। करीब आधे घंटे की गहन चिकित्सा के बाद बच्चे की स्थिति में सुधार होने लगा। बच्चे की प्रतिक्रिया देखकर परिजनों एवं वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। वर्तमान में मोहम्मद फैजान पूरी तरह स्वस्थ होकर खतरे से बाहर है। घटना का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि संकट की उस घड़ी में बच्चे के अधिकांश रिश्तेदार मौके पर मौजूद नहीं थे, लेकिन समाजसेवी अलीम अंसारी पूरी रात बच्चे और उसके परिजनों के साथ खड़े रहे। बच्चे के परिजनों ने अलीम अंसारी एवं डॉ. रुपेश अग्रवाल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी समय पर मिली सहायता उनके परिवार के लिए किसी ईश्वरीय कृपा से कम नहीं है।
उल्लेखनीय है कि समाजसेवी अलीम अंसारी स्वास्थ्य, शिक्षा, रक्तदान और जनसेवा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं। वे व्यवसाय के साथ-साथ प्रतिदिन लगभग 70 किलोमीटर की यात्रा कर समाजसेवा के लिए भी समय निकालते हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में जरूरतमंदों की सहायता के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं, जिसके लिए उन्हें विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनेक बार सम्मानित किया जा चुका है।
इस संबंध में अलीम अंसारी ने कहा, ‘मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है’ यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन का थोड़ा-सा समय निस्वार्थ भाव से समाज के लिए समर्पित कर दे, तो अनेक जिंदगियां संवर सकती हैं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन स्वतः दिखाई देने लगेंगे।
यह घटना केवल एक बच्चे की जान बचने की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश भी देती है कि संवेदनशीलता, समय पर निर्णय और निस्वार्थ सेवा किसी के लिए नया जीवन बन सकती है।

पुण्य, सेवा और संवेदनशीलता की मिसाल: समाजसेवी अलीम अंसारी व डॉ. रुपेश अग्रवाल की तत्परता से बची 12 वर्षीय मोहम्मद फैजान की जान">







