
तखतपुर (बिलासपुर):—तखतपुर ब्लॉक में पिछले 15 दिनों से वायरल फीवर ने पांव पसार लिया है। आलम यह है कि क्षेत्र के हर दूसरे घर में कोई न कोई व्यक्ति तेज बुखार, सर्दी-खांसी और बदन दर्द से पीड़ित है। मौसम में बदलाव के बाद फैले इस बुखार ने सबसे ज्यादा बच्चों और बुजुर्गों को अपनी चपेट में लिया है।
स्थानीय लोगों की मानें तो सरकारी अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की लंबी कतार लग रही है, लेकिन डॉक्टरों की कमी और दवाइयों के अभाव में लोगों को बिना इलाज के ही लौटना पड़ रहा है। जिसका सीधा फायदा निजी क्लीनिक और अस्पताल उठा रहे हैं।
निजी अस्पतालों में लूट
तखतपुर के निजी अस्पतालों में वायरल फीवर के नाम पर मनमानी फीस वसूली जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि 100-200 रुपये की जांच के लिए 500 से 800 रुपये तक लिए जा रहे हैं और बुखार की सामान्य दवा के साथ हजारों रुपये की एंटीबायोटिक और जांचें लिख दी जा रही हैं। मजबूरी में लोग लुटने को मजबूर हैं।
गांव-गांव में सक्रिय झोला छाप
सबसे चिंताजनक स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है। सकरी, घुटकू, जुनापारा, नगोई, जूनापारा समेत दर्जनों गांवों में झोला छाप डॉक्टरों की बाढ़ आ गई है। बिना किसी डिग्री के ये लोग बाइक पर बैग टांगकर घर-घर जाकर एक ही सीरिंज से कई लोगों को इंजेक्शन लगा रहे हैं। गलत दवाइयों के कारण कई मरीजों की हालत और बिगड़ रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें झोला छाप डॉक्टरों के भरोसे रहना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग मौन
इतने बड़े पैमाने पर वायरल फीवर फैलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांवों में न तो कोई विशेष शिविर लगाया गया है और न ही झोला छाप डॉक्टरों पर कोई कार्रवाई की जा रही है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव-गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं और अवैध रूप से इलाज कर रहे लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।

तखतपुर में वायरल फीवर का कहर, निजी चिकित्सकों की बल्ले-बल्ले, गाँव-गाँव में झोला छाप कर रहे इलाज">







