
*गरियाबंद*:- राजिम पुल की बदहाल व्यवस्था और पिछले करीब 15 दिनों से बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट को लेकर प्रकाशित खबर का बड़ा असर देखने को मिला है। खबर सामने आने के बाद आखिरकार संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद से जागे और गुरुवार सुबह राजिम पुल पर मरम्मत के नाम पर काम शुरू कराया गया। हालांकि, मौके पर हो रहा कार्य देखकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या विभाग केवल खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने में जुटा है?

रायपुर और गरियाबंद जिले को जोड़ने वाला राजिम का यह महत्वपूर्ण पुल प्रतिदिन हजारों राहगीरों और वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। धर्मनगरी राजिम के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले इस पुल पर रात के समय लंबे समय से अंधेरा पसरा हुआ था। पुल की लाइटें बंद होने के साथ ही सड़क पर जगह-जगह छोटे-बड़े गड्ढे भी राहगीरों के लिए परेशानी और दुर्घटना का कारण बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर करीब 52 स्थानों पर छोटे-बड़े गड्ढे नजर आ रहे हैं। अंधेरे के बीच इन गड्ढों का दिखाई नहीं देना दोपहिया वाहन चालकों के लिए खासा जोखिम पैदा कर रहा है। ऐसे में कभी भी गंभीर सड़क दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों का भी इसी मार्ग से लगातार आना-जाना होता है, इसके बावजूद लंबे समय तक बंद पड़ी लाइट और सड़क की बदहाली पर किसी ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग द्वारा सुबह-सुबह मरम्मत कार्य शुरू कराया जाना यह बताता है कि यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी ध्यान दें तो समस्याओं का समाधान संभव है।

लेकिन अब सवाल यह है कि क्या विभाग वास्तव में पुल की पूरी व्यवस्था दुरुस्त करेगा या फिर मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर मामला शांत कर दिया जाएगा? लोगों की मांग है कि पुल की सभी खराब लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए और सड़क पर बने सभी गड्ढों की स्थायी मरम्मत की जाए, ताकि रात के समय राहगीरों को सुरक्षित आवागमन मिल सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि राजिम जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर के प्रवेश द्वार पर इस तरह की बदहाली शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि विभाग की यह कार्रवाई सिर्फ दिखावे तक सीमित रहती है या राजिम पुल की समस्या का वास्तव में स्थायी समाधान किया जाता है।







