
*गरियाबंद*:- गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड में बारिश ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। टूटे पुल और नाले पर आवागमन की समस्या के बीच अब तस्वीर के दो पहलू सामने आए हैं। एक तरफ राजिम विधायक रोहित साहू ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों के साथ मोर्चा संभाला और जेसीबी-ट्रैक्टर लगवाकर वैकल्पिक रास्ते का काम शुरू कराया, तो दूसरी तरफ लंबे समय से पुलिया निर्माण की मांग पूरी नहीं होने से नाराज और मजबूर ग्रामीण खुद चंदा जुटाकर वैकल्पिक पलिया बनाने में जुट गए हैं।
छुरा मुख्यालय से महज 4 से 5 किलोमीटर दूर कोगालबाहरा नाला पर टेंगनाबासा से सिवनी रोड को जोड़ने वाला मार्ग बारिश के दिनों में ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। धर्मपुर और राजपुर सहित आसपास के ग्रामीणों ने कई बार शासन-प्रशासन से पुलिया निर्माण की मांग की, लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर अब ग्रामीणों ने स्वयं जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया है। गांव-गांव से चंदा जुटाकर ट्रैक्टर, जेसीबी और मानव श्रम की मदद से नाले पर वैकल्पिक पलिया बनाने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस मुख्यालय की दूरी इस मार्ग से करीब 5 किलोमीटर है,
उसी छुरा पहुंचने के लिए दूसरे रास्ते से लगभग 15 किलोमीटर का सफर करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, किसानों, मरीजों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को होती है। बारिश में नाले का पानी बढ़ने पर वाहन निकालना जोखिम भरा हो जाता है और कई बार वाहन खराब होने की स्थिति भी बनती है।
इधर विधायक ने मौके पर संभाला मोर्चा
वहीं कोसमबुड़ा–सारागांव, चूरकीदादर मार्ग पर क्षतिग्रस्त पुल की जानकारी मिलने पर राजिम विधायक रोहित साहू स्वयं मौके पर पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों और ग्रामीणों के साथ टूटे पुल का निरीक्षण किया और मौके पर ही जेसीबी एवं ट्रैक्टर बुलवाकर वैकल्पिक रास्ते का काम शुरू कराया। विधायक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बारिश के दौरान ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का आवागमन बाधित नहीं होना चाहिए।
इस मार्ग से करीब 10 पंचायतों के लोगों का आवागमन जुड़ा हुआ है। पुल क्षतिग्रस्त होने से स्कूली बच्चों, किसानों और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। विधायक ने मौके पर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों से उनकी समस्याएं सुनीं तथा स्थायी समाधान के लिए पुल के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
सवाल यही—ग्रामीण आखिर कब तक खुद बनाते रहेंगे रास्ते?
एक ओर विधायक द्वारा मौके पर पहुंचकर तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कराना राहत की बात है, लेकिन दूसरी ओर कोगालबाहरा नाला के ग्रामीणों का खुद चंदा जुटाकर पलिया बनाने को मजबूर होना व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब किसी गांव के लोग बार-बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी अपनी मूलभूत जरूरत के लिए स्वयं पैसा और श्रम लगाने को मजबूर हों, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान कब करेगा?
ग्रामीणों की मांग है कि फिलहाल वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था तो की जाए, लेकिन इसके साथ ही नाले पर मजबूत और स्थायी पुलिया का निर्माण भी कराया जाए, ताकि हर बारिश में उन्हें आवागमन के लिए इसी तरह संघर्ष न करना पड़े।

टूटे पुल पर विधायक रोहित साहू ने संभाला मोर्चा, प्रशासन की बेरुखी से ग्रामीण खुद जुटा रहे चंदा">







