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सहकार भारती के तत्वाधान में बुनकर प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अधिवेशन प्रारम्भ

 

राजधानी के जैनम मानस भवन में शुरू हुआ राष्ट्रीय अधिवेशन
उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन उद्घाटन सत्र में हुए शामिल

समापन सत्र में राज्यपाल और गृह मंत्री होंगे शामिल,

17 राज्यों से 600 बुनकर प्रतिनिधि पहुंचे..

*रायपुर 23 अगस्त 2025.* सहकार भारती के तत्वाधान में राजधानी के जैनम मानस भवन में बुनकर प्रकोष्ट का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आज से प्रारम्भ हो गया। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और सहकार भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय जोशी ने अधिवेशन की शुरुआत पूर्व ध्वजारोहण किया। उद्घाटन सत्र में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, अपैक्स बैंक के चैयरमेन केदार गुप्ता, खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष राकेश पांडेय अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में शामिल हुए। सहकार भारती द्वारा राजधानी रायपुर के जैनम मानस भवन में 23 अगस्त और 24 अगस्त को देश में पहली बार राष्ट्रीय बुनकर अधिवेशन का आयोजन किया गया है। इसमें उत्तरप्रदेश, बिहार, आसाम,मध्यप्रदेश उड़ीसा महाराष्ट्र सहित देशभर के 17 राज्यों से विभिन्न बुनकर संघों केकरीब 600 प्रतिनिधि शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। साय अपने संदेश में छत्तीसगढ़ में विभिन्न क्षेत्रों में सहकारिता को मजबूत करने के लिए किए गए कार्यों की जानकारी दी और उन्होंने अधिवेशन की सफलता के लिए आयोजकों और प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं भी दीं।

सहकारिता हमारे रग-रग में बसी हुई- अरुण साव
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सहकारिता हमारे रग-रग में बसी हुई है, हम सब ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से पले-बढ़े हैं। भारत अपने कुटीर उद्योगों और ग्राम उद्योगों की बदौलत लंबे समय तक पूरी दुनिया के लिए ‘सोने की चिड़िया’ था, आजीविका के अवसरों को बढ़ाने, देश को आत्मनिर्भर एवं सक्षम बनाने में बुनकर और उनकी सहकार की भावना काफी अहम है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा
“कि यह गर्व का विषय है कि अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष में यह अधिवेशन छत्तीसगढ़ में हो रहा है। सहकार से समृद्धि के तहत राज्य में 54 पहल किए गए हैं जो सीधे-सीधे गांवों, गरीबों व किसानों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 20 हजार हाथकरघा कार्यरत हैं जिनके माध्यम से 60 हजार 300 लोगों को रोजगार मिल रहा है।

राज्य में 329 पंजीकृत प्राथमिक बुनकर सहकारी समितियां महासंघ से जुड़ी हुई हैं जो सरकारी वस्त्र उत्पादन में सक्रिय हैं। महासंघ द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों को स्कूल यूनिफार्म, पुलिस ड्रेस, कंबल, चादर और अन्य प्रकार के कपड़ों की आपूर्ति की जा रही है। बुनकर सहकारी समितियों को सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय सहकारी नीति से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में भी सहकारी नीति तैयार की जा रही है।  कश्यप ने सहकार भारती के पदाधिकारियों को अधिवेशन की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस अधिवेशन से बुनकरों में जागरूकता बढ़ाने और सहकारिता आंदोलन को गति प्रदान करने में मदद मिलेगी।

अपने उद्बोधन में उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि बुनकर समाज बड़ी लगन और मेहनत के साथ कार्य करते हैं। बुनकर आदिकाल से बुनकरी के माध्यम से कपड़ा निर्माण का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में बुनकरों के हित में अच्छे कार्य हो रहे हैं। हमने बुनकरों के सम्मेलन में बुनकरों की मजदूरी बढ़ाने की बात कही थी और मुख्यमंत्री विष्णु देवसाय ने तत्काल बुनकरों की मजदूरी 20 प्रतिशत बढ़ा दी, जिसका 60 हजार बुनकर परिवार को सीधा लाभ मिल रहा है।

सहकार भारती के अध्यक्ष डॉ. उदय जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता लोगों का स्थायी आर्थिक विकास करता है। सहकार भारती देश के 28 राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के 650 जिलों में काम कर रही है। पिछले दो वर्षो में अलग-अलग प्रकोष्ठों द्वारा 12 राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किए गए हैं। इस अधिवेशन में बुनकरों के लिए राष्ट्रीय एजेंडा तैयार कर सरकार से बात करेंगे। यहां देशभर के अलग-अलग बुनकर संघ अपने कार्यों, समस्याओं और भविष्य के बारे में विचार-विमर्श कर आगे बढ़ने की रणनीति बनाएंगे। सहकार भारती के राष्ट्रीय महामंत्री दीपक कुमार चौरसिया ने अधिवेशन में कहा कि “सहकारिता व्यक्ति के संघर्ष को शक्ति देता है। इससे आर्थिक विकास के साथ ही इंसान को सबल होने का मौका मिलता है। बुनकर परंपरा, संस्कृति और आजीविका को जोड़ता है। देश में करीब ढाई करोड़ लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हुए हैं। इस अधिवेशन से उनकी सामाजिक-आर्थिक चेतना को जगाने का काम होगा। उन्होंने बताया कि भारत से हर वर्ष साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए के कपड़ों का निर्यात होता है, इसमें 15 प्रतिशत हिस्सेदारी बुनकरों के काम का है।’

कार्यक्रम में सहकार भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री संजय पाचपोर, राष्ट्रीय बुनकर प्रकोष्ठ के संयोजक अनंत कुमार मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम चंद्रवंशी, महामंत्री कनीराम जी, अधिवेशन संयोजक सुरेन्द्र पाटनी, सह-संयोजक पुरुषोत्तम देवांगन, व्यवस्था प्रमुख अजय अग्रवाल, स्वागत समिति की सदस्य श्रीमती शताब्दी पाण्डेय और प्रीतपाल बेलचंदन सहित सहकार भारती के अन्य पदाधिकारी तथा सहकारिता व ग्रामोद्योग विभाग के अधिकारी भी उद्घाटन सत्र में मौजूद रहे।

कपड़ों, हस्तशिल्प और वनोत्पादों की प्रदर्शनी
अधिवेशन स्थल में विभिन्न राज्यों के बुनकरों द्वारा तैयार कपड़े, हस्तशिल्प से निर्मित सामग्रियों और वनोत्पादों की प्रदर्शनी-सह-बिक्री के लिए स्टॉल भी लगाए गए हैं। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप, श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन, सहकार भारती के राष्ट्रिय अध्यक्ष  जोशी ने इसका शुभारंभ किया।

समापन सत्र में राज्यपाल होंगे शामिल
दो दिवसीय सत्र का रविवार दोपहर समापन होगा जिसमे बतौर मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और रामविचार नेताम शामिल होंगे।

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