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सप्तमी पर भक्ति उमंग का सागर, लाखों श्रद्धालु पैदल पहुंचे महामाया दरबार

रतनपुर से ताहिर अली की रिपोर्ट
रतनपुर से ताहिर अली की रिपोर्ट

कालरात्रि के जयकारों से गूंजा रतनपुर, पदयात्रा में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

रतनपुर,,,,, नवरात्र की सप्तमी पर आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि रतनपुर की ओर जाने वाली हर राह भक्ति रस से सराबोर हो गई। मां महामाया के चरणों में लाखों श्रद्धालु नतमस्तक हुए और कालरात्रि स्वरूप की पूजा कर मनोकामनाओं का आशीर्वाद पाया। रतनपुर का ये अद्भुत नजारा श्रद्धा, सेवा और भक्ति का प्रतीक बनकर सबके दिलों को छू गया।

सप्तमी की रात रतनपुर में आस्था का महासागर उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालु महामाया के दर्शन के लिए पैदल पदयात्रा करते हुए पहुंचे। कोई नंगे पांव तो कोई सिर पर नारियल, चुनरी और कलश लेकर मां के दरबार तक पहुंचा। भक्तों का कहना था कि मां के चरणों में पहुंचकर सारी थकान मिट जाती है और आत्मा को अद्भुत शांति का अनुभव होता है।नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के कालरात्रि स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि इस दिन मां कालरात्रि भक्तों को भय और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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यही कारण है कि दूर-दराज़ के गांवों और शहरों से हजारों लोग पैदल चलकर रतनपुर आते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि पैदल चलकर दर्शन करने से उनकी मनोकामनाएं जल्दी पूर्ण होती हैं और यह तपस्या मां के चरणों में सबसे बड़ी भक्ति है।इस बार की नवरात्रि में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए 50 बसों की व्यवस्था की गई। वहीं मंदिर ट्रस्ट और सेवा समितियां भी रातभर व्यवस्था में लगी रहीं।

कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को पानी, प्रसाद और भोजन उपलब्ध कराया गया। जिग-जैक व्यवस्था से भक्तों को सुव्यवस्थित तरीके से दर्शन कराए गए।मां महामाया मंदिर प्रांगण में इस बार 31 हज़ार 1 सौ ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए। श्रद्धालु इन मनोकामना ज्योति कलशों के दर्शन के लिए भी लाइन में लगे रहे। सप्तमी की रात मंदिर परिसर में भक्ति गीतों और भजनों का आयोजन हुआ,

जहां भागवत मंच से देर रात तक जस गीतों की गूंज सुनाई देती रही। पूरा वातावरण ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूंज उठा।भक्ति के इस पर्व में सिर्फ आम श्रद्धालु ही नहीं बल्कि प्रदेश के मंत्री, विधायक, विपक्ष के नेता और फिल्मी हस्तियां भी मां महामाया के दरबार पहुंचीं और आशीर्वाद लिया। भक्तों का कहना था कि मां महामाया का दर्शन मात्र से मन को संतोष और आत्मा को शांति मिलती है।

रतनपुर की सप्तमी इस बार भी आस्था, सेवा और समर्पण का संगम बनी। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़, पैदल यात्रा की परंपरा, ज्योति कलश का अद्भुत नजारा और प्रशासन की चुस्त व्यवस्था—इन सबने मिलकर सप्तमी की रात को भक्ति महापर्व में बदल दिया। मां महामाया के दरबार में उमड़ा ये जनसैलाब छत्तीसगढ़ की आस्था की सबसे बड़ी तस्वीर पेश करता है

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