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जटगा रेंज में 70–80 हाथियों का डेरा, भंवर कछार में घरों और फसलों को भारी नुकसान

पोड़ी उपरोड़ा से नंदकुमार यादव की रिपोर्ट

जटगा वन रेंज में 70–80 हाथियों का झुंड लगातार विचरण कर रहा है। हाथियों का यह समूह भंवर कछार और आसपास के इलाकों में प्रवेश कर कई घरों को नुकसान पहुँचा चुका है। ग्रामीणों के अनुसार हाथियों ने फसलों को भी गंभीर रूप से रौंद दिया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है।

स्थानीय लोग भय के वातावरण में रातें गुज़ारने को मजबूर हैं। वन विभाग की टीम लगातार हाथियों की मूवमेंट पर नजर रख रही है

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और ग्रामीणों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। हालांकि, हाथियों के बड़े झुंड के कारण विस्थापन और नियंत्रण की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

जटगा रेंज के भंवर कछार क्षेत्र में लगातार विचरण कर रहे हाथियों के झुंड ने ग्रामीणों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। हाथियों ने न केवल कई घरों को नुकसान पहुँचाया,

बल्कि लोगों की सब्जी बाड़ी और खेतों को भी पूरी तरह तबाह कर दिया है। इसके चलते किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मेहनत से तैयार फसलें और सब्जी बाड़ी कुछ ही घंटों में रौंद डाली गईं। लगातार हो रहे नुकसान से लोगों में हाथियों के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

जटगा रेंज के भंवर कछार क्षेत्र में हाथियों द्वारा घरों और फसलों को पहुँचाए गए नुकसान से किसान पहले ही गहरी आर्थिक संकट में हैं। स्थिति को और गंभीर बनाती है शासन द्वारा दी जाने वाली क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि, जो ग्रामीणों के अनुसार नाम मात्र की होती है।

पीड़ित किसानों ने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि फसल में लगाए गए बीज और दवाइयों के खर्च तक को भी पूरा नहीं कर पाती,

ऐसे में पूरे खेत उजड़ जाने पर वास्तविक भरपाई होना लगभग असंभव है। किसानों का कहना है कि जब उत्पादन की लागत ही वापस नहीं मिलती, तो उनके सामने परिवार चलाने और अगली फसल की तैयारी में बड़ी कठिनाई खड़ी हो जाती है।

ग्रामीणों ने हाथी आतंक पर नियंत्रण और उचित मुआवजा बढ़ाने की मांग की है, ताकि हुए वास्तविक नुकसान की भरपाई संभव हो सके।

लोगों का कहना है कि यदि राहत राशि में सुधार नहीं किया गया, तो छोटे और मध्यम किसान आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट जाएंगे।

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