
तत्काल ज्वाइनिंग के आदेश के बावजूद खनिज अधिकारी का पद पर बने रहना, पुराने विवादों और कथित माफिया कनेक्शन की चर्चाओं को फिर दे रहा हवा
*गरियाबंद*:- (छत्तीसगढ़):
प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद सुशासन और पारदर्शिता के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन गरियाबंद जिले में कुछ शासकीय कर्मियों का रवैया इन दावों पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। ताजा मामला खनिज विभाग से जुड़ा है, जहां उपसचिव श्रीकांत वर्मा द्वारा 8 दिसंबर को जारी स्थानांतरण आदेश के 16 दिन बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
आदेश में स्पष्ट रूप से “तत्काल प्रभाव से ज्वाइनिंग” के निर्देश दिए गए थे, लेकिन खनिज अधिकारी रोहित साहू अब तक अपनी कुर्सी छोड़ते नजर नहीं आ रहे हैं। प्रशासनिक हलकों में यह स्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है।
पुराने विवाद और माफिया कनेक्शन की चर्चाएं फिर तेज
यह पहला मौका नहीं है जब खनिज अधिकारी रोहित साहू विवादों में घिरे हों। अतीत में भी उन पर एक रसूखदार खनिज माफिया से कथित संबंधों के आरोप लगते रहे हैं। गलियारों में लंबे समय से उनकी खनिज माफियाओं के साथ कथित जुगलबंदी की चर्चाएं आम रही हैं।

पूर्व के कई घटनाक्रमों और विवादों के चलते वे पहले भी सुर्खियों में रह चुके हैं। ऐसे में तबादला आदेश के बावजूद कुर्सी न छोड़ने की जिद ने पुराने आरोपों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। लोग सवाल पूछ रहे हैं—आखिर इस कुर्सी मोह के पीछे असली वजह क्या है?
कुर्सी का मोह या ‘चढ़ावे’ का जादू?
प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर वह कौन-सा चुंबकीय आकर्षण है, जो साहब को नई पदस्थापना पर जाने से रोक रहा है।
सूत्रों का दावा है कि जिले में अवैध खनन और अवैध परिवहन से जुड़े कथित खेल में प्रति ट्रिप के हिसाब से वसूली की चर्चा लंबे समय से चल रही है। कहा जा रहा है कि बिना रॉयल्टी दौड़ने वाले हाईवा कुछ लोगों के लिए कुबेर का खजाना साबित हो रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह पूरा मामला जांच का विषय है।

कलेक्टर का तर्क और प्रशासनिक पेच
इस देरी को लेकर जब गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि रिलीवर के न आने के कारण वर्तमान अधिकारी को रिलीव नहीं किया गया है।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब निवर्तमान अधिकारी ही कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं, तो नया अधिकारी कार्यभार कैसे संभालेगा? यह स्थिति अब एक प्रशासनिक पहेली बनती जा रही है।
खनिज अधिकारी की चुप्पी बढ़ा रही संदेह
मामले की सच्चाई जानने के लिए हमारे प्रतिनिधि ने खनिज अधिकारी रोहित साहू से उनके मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क करने का प्रयास किया, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें। लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव करना उचित नहीं समझा।
उनकी यह चुप्पी कई अनुत्तरित सवालों को जन्म दे रही है और संदेह को और गहरा कर रही है।










